किशनगंज: बीमारी के लक्षणों का इंतजार नहीं, घर-घर पहुंचकर हो रही स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान

हिन्दुस्तान, भागलपुर
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किशनगंज से अवधेश झा की रिपोर्ट गैर-संचारी रोग अक्सर अचानक सामने नहीं आते।

किशनगंज: बीमारी के लक्षणों का इंतजार नहीं, घर-घर पहुंचकर हो रही स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान

किशनगंज से अवधेश झा की रिपोर्ट गैर-संचारी रोग अक्सर अचानक सामने नहीं आते। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियां लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के शरीर में अपना प्रभाव बढ़ाती रहती हैं। यही वजह है कि बीमारी महसूस होने तक इंतजार करना कई बार उपचार को जटिल बना देता है। ऐसे में समय रहते जोखिम की पहचान और नियमित जांच ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव का सबसे प्रभावी रास्ता बनती है। इसी सोच को जमीन पर उतारने के लिए बिहार में शुरू किया गया ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान अब जिले में तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

अभियान की कार्यप्रणाली

अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा घर-घर पहुंचकर 30 वर्ष एवं उससे अधिक उम्र के लोगों में गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। इसके साथ ही लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए लगातार प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। अभियान की गतिविधियों को केवल स्क्रीनिंग तक सीमित न रखते हुए जांच में चिन्हित लोगों को उपचार और नियमित फॉलोअप से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवा की पहुंच

आज गैर-संचारी रोग कार्यक्रम के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, कोचाधामन का भ्रमण किया गया। इस दौरान एनसीडी स्क्रीनिंग की स्थिति, कार्यक्रम से संबंधित गतिविधियों तथा समुदाय तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच की समीक्षा की गई। स्वास्थ्यकर्मियों से स्क्रीनिंग के दौरान सामने आ रहे मामलों, चिन्हित लोगों को आगे की जांच एवं उपचार से जोड़ने और नियमित फॉलोअप की व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली गई।

घर-घर स्क्रीनिंग का महत्व

अस्पताल आने का इंतज़ार खत्म, स्वास्थ्य सेवा पहुंच रही घर की चौखट तक ‘चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसमें स्वास्थ्य व्यवस्था को मरीज के अस्पताल पहुंचने का इंतजार नहीं करना है। स्वास्थ्यकर्मी स्वयं समुदाय और परिवारों तक पहुंच रहे हैं। विशेष रूप से उन लोगों को जांच के दायरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है, जो स्वस्थ महसूस करने के कारण नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं कराते।

घर-घर स्क्रीनिंग के दौरान रक्तचाप और रक्त शर्करा जैसी प्राथमिक जांचों के माध्यम से जोखिमग्रस्त लोगों की पहचान की जा रही है। आवश्यकता के अनुसार संबंधित व्यक्ति को स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा जिला अस्पताल से जोड़ा जा रहा है।

कोचाधामन पीएचसी की जानकारी

अभियान की जमीनी स्थिति को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों की गतिविधियों की नियमित समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में कोचाधामन पीएचसी में एनसीडी स्क्रीनिंग और कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों का जायजा लिया गया। निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों तक स्क्रीनिंग की सुविधा कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रही है। स्वास्थ्यकर्मियों को यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि स्क्रीनिंग के दौरान किसी व्यक्ति में बीमारी अथवा जोखिम की पहचान होने के बाद उसे केवल सूची में दर्ज कर छोड़ न दिया जाए, बल्कि आगे की जांच, उपचार और फॉलोअप से जोड़ा जाए।

प्रचार-प्रसार की रणनीति

प्रचार-प्रसार से लोगों को जांच के लिए किया जा रहा प्रेरित अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से विभिन्न स्तरों पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। लोगों को बताया जा रहा है कि 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है। स्वास्थ्यकर्मी परिवारों को यह संदेश भी दे रहे हैं कि किसी बीमारी के लक्षण दिखाई देने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। सामान्य महसूस करने वाला व्यक्ति भी उच्च रक्तचाप, मधुमेह या अन्य गैर-संचारी रोग के जोखिम में हो सकता है। ऐसे में समय-समय पर जांच ही वास्तविक स्थिति जानने का माध्यम है।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता

स्वस्थ दिखना बीमारी से मुक्त होने की गारंटी नहीं जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने जिलेवासियों से अपील की है कि गैर-संचारी रोगों को लेकर लापरवाही न बरतें। उन्होंने कहा कि कई गंभीर बीमारियों की शुरुआत बिना स्पष्ट लक्षणों के होती है। इसलिए बीमारी के लक्षण दिखाई देने तक इंतजार करने के बजाय नियमित जांच कराना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मी जब घर तक पहुंचकर जांच की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं, तो लोगों को इसका लाभ अवश्य उठाना चाहिए। परिवार में 30 वर्ष एवं उससे अधिक उम्र के सभी सदस्यों की आवश्यक जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार का जोखिम सामने आता है तो चिकित्सकीय सलाह को गंभीरता से लिया जाए। जिला पदाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मियों को भी निर्देशित किया कि अभियान को केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित न रखा जाए। प्रत्येक चिन्हित व्यक्ति तक उपचार और फॉलोअप की सुविधा पहुंचाना अभियान की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान, समय पर उपचार और नियमित निगरानी—गैर-संचारी रोगों से बचाव की सबसे मजबूत कड़ी है।

रोगों पर ध्यान केंद्रित करना

कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के साथ कई रोगों पर नजर अभियान के तहत उच्च रक्तचाप और मधुमेह के अलावा मुंह, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की स्क्रीनिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हृदय रोग, सीओपीडी और गैर-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज जैसे रोगों के जोखिम की पहचान भी कार्यक्रम का हिस्सा है।

अभियान की सफलता की चुनौतियाँ

आंकड़ों से आगे उपचार तक पहुंचाना होगी अभियान की असली सफलता गैर-संचारी रोग कार्यक्रम के तहत चल रहा यह अभियान स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पताल-केंद्रित व्यवस्था से निकालकर समुदाय-केंद्रित व्यवस्था की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। घर-घर स्क्रीनिंग से उन लोगों तक भी पहुंच बनाई जा रही है, जो आर्थिक, सामाजिक अथवा जागरूकता की कमी के कारण नियमित जांच नहीं करा पाते। अब अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि स्क्रीनिंग के दौरान सामने आए प्रत्येक जोखिमग्रस्त व्यक्ति को उपचार की निरंतर प्रक्रिया से जोड़ा जाए। साथ ही लोगों में यह व्यवहार विकसित हो कि स्वास्थ्य जांच केवल बीमारी होने के बाद की आवश्यकता नहीं, बल्कि बीमारी से बचाव का माध्यम भी है。

सामान्य प्रश्न

✦इस अभियान का उद्देश्य क्या है?−
अभियान का उद्देश्य 30 वर्ष एवं उससे अधिक उम्र के लोगों में गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग करना और उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में जागरूक करना है।
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