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खरगे से नीतीश ने नहीं की बात, मांझी को राहुल ने मिलाया फोन; क्या बिहार में दिखेगा नया समीकरण?

Bihar Politics: बिहार की मौजूदा सियासत पल-पल में बदल रही है। नीतीश कुमार के NDA में शामिल होने की अटकलों के बीच कांग्रेस पार्टी ने बिहार में हम पार्टी के मुखिया जीतन राम मांझी से संपर्क किया है।

खरगे से नीतीश ने नहीं की बात, मांझी को राहुल ने मिलाया फोन; क्या बिहार में दिखेगा नया समीकरण?
Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSat, 27 Jan 2024 05:23 PM
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Bihar Politics: बिहार में सियासी बयार पल-पल बदल रही है। ऐसी अटकलें है कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार आज या अगले दिन अपने पद से इस्तीफा देने वाले हैं। बताया जा रहा है महागठबंधन का साथ छोड़ने के बाद वह एक बार फिर बीजेपी के साथ सरकार बनाने की योजना बना रहे हैं। वहीं बीजेपी नेतृत्व नीतीश को अपने पाले में लाने के लिए उत्सुक है। बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन में अहम साझेदार आरजेडी भी लगातार बैठकें कर राज्य में सरकार बचाने की संभावनाओं चर्चा कर रही है। उधर कांग्रेस भी बिहार की सियासत को लेकर एक्टिव होती नजर आ रही है। ऐसी खबरें हैं कि कांग्रेस छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को वरिष्ठ पर्यवेक्षक के रूप में बिहार भेजेगी जहां वह जीतनराम मांझी से मुलाकात कर सकते हैं।

खरगे और नीतीश की नहीं हुई बातचीत
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन दोनों बहुत व्यस्त थे इसलिए उनके बीच कोई बातचीत नहीं हो सकी। जयराम रमेश ने कहा, "मैं आपको बता दूं मल्लिकार्जुन खरगे ने नीतीश कुमार से कई बार बात करने की कोशिश की। मगर बाद में दोनों बिजी हो गए। जब मल्लिकार्जुन खरगे ने उन्हें कॉल किया तो नीतीश कुमार बिजी रहे। जब नीतीश कुमार ने कॉल बैक किया तो खरगे किसी मीटिंग में थे।"

राहुल गांधी ने लगाया जीतनराम मांझी को फोन
इंडिया टुडे के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए में जाने की अटकलों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के संस्थापक और पूर्व सीएम जीतनराम मांझी को फोन मिलाया। कथित तौर पर राहुल गांधी ने मांझी से इंडिया गठबंधन में शामिल होने पर विचार करने के लिए कहा। ऐसा बताया जा रहा है कि बिहार के वरिष्ठ पर्यवेक्षक के रूप में कार्य कर रहे कांग्रेस नेता भूपेश बघेल की जल्द ही मांझी के साथ बैठक हो सकती है। बता दें मांझी की पार्टी के पास बिहार की वर्तमान विधानसभा में 4 विधायक हैं और वह भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को अपना समर्थन देती है।

क्यों जरूरी है मांझी का साथ?
सूत्रों के मुताबिक, दावा किया जा रहा है कि राजेडी किसी दलित चेहरे को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे कर सकती है और राजद-कांग्रेस एवं वाम दलों के विधायकों की परेड गवर्नर के सामने करा सकता है। बता दें कि 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में राजद सबसे बड़ी पार्टी है। उसके पास 79 विधायक हैं। विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है। बीजेपी 78 विधायकों के साथ दूसरे स्थान पर है। जेडीयू 45 विधायकों के साथ तीसरे नंबर की पार्टी है। कांग्रेस के 19 और वामदलों के 16 विधायक हैं। अगर राजद, कांग्रेस और वाम दलों के विधायकों की संख्या जोड़ दें तो कुल विधायकों की संख्या 114 हो जाती है, जो बहुमत से आठ कम है। इसके असावा जीतनराम मांझी के पास चार विधायक हैं, जो बहुमत का रास्ता आसान कर सकते हैं।

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