मुंगेर: ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र और सुविधाओं को लेकर आयोग गंभीर
बिहार सरकार के उच्च जाति विकास राज्य आयोग के सदस्य राजकुमार सिंह ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की प्रक्रिया में सुधार की जानकारी दी। अब यह प्रमाण पत्र एक वर्ष तक वैध रहेगा। आयोग ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत बहाली और अन्य सेवाओं में सफलता के बारे में भी बताया, साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए शिक्षा की सुविधाएं बढ़ाने की अनुशंसा की।

मुंगेर से राजेश की रिपोर्ट बिहार सरकार के उच्च जाति विकास राज्य आयोग के सदस्य राजकुमार सिंह ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता कर ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के अभ्यर्थियों के लिए आयोग द्वारा की गई पहल और अनुशंसाओं की जानकारी दी। राजकुमार सिंह ने बताया कि आयोग के गठन के बाद ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही कठिनाइयों को दूर कर प्रक्रिया में सरलता लाई गई है। पहले ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की वैधता निर्गत तिथि चाहे जो भी हो, 31 मार्च को समाप्त हो जाती थी। अब सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर प्रावधान किया गया है कि प्रमाण पत्र निर्गत होने की तिथि से पूरा एक वर्ष तक वैध रहेगा।
इस संबंध में सभी प्रखंडों को निर्देश भेज दिए गए हैं।उन्होंने बताया कि सिपाही भर्ती में कुल 19,800 से अधिक पदों में से 1,983 पदों पर ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत बहाली हुई है। इसके अलावा यूपीएससी में ईडब्ल्यूएस के तहत 26 अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त कर Allied सेवाओं से प्रमोट होकर IAS और IPS का पद हासिल किया है। इस ऐतिहासिक पहल के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का धन्यवाद व्यक्त किया। राजकुमार सिंह ने कहा कि आयोग का मुख्य कार्य राज्य सरकार को अनुशंसा भेजना है। राज्य सरकार के सर्वे के अनुसार लगभग 52% लोग (8 लाख तक की वार्षिक आय वाले) ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। आयोग ने सरकार से अनुशंसा की है कि अन्य वर्गों की तरह ईडब्ल्यूएस परिवार के बच्चों को भी हॉस्टल, मुफ्त कोचिंग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधा दी जाए। साथ ही हर प्रमंडल में एक-एक आवासीय विद्यालय खोलने की भी मांग की गई है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी बच्चों का भविष्य संवर सके।


