BHU Protest voice raised in favour of Professor Feroze Khan - बीएचयू प्रदर्शन: प्रोफेसर फिरोज खान के पक्ष में उठी आवाज, कहा- धर्म के आधार पर मत बांटो DA Image
13 दिसंबर, 2019|1:35|IST

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बीएचयू प्रदर्शन: प्रोफेसर फिरोज खान के पक्ष में उठी आवाज, कहा- धर्म के आधार पर मत बांटो

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बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत धर्म विद्या संकाय में सहायक प्रोफेसर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति के बाद उठे विवाद पर कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में संस्कृत पढ़ा रहे मुस्लिम अध्यापकों ने कहा है कि शिक्षा का कोई धर्म नहीं होता है। इस मसले पर एकजुटता बताते हुए उनका कहना है कि उन्हें संस्कृत पढ़ाते हुए कभी किसी तरह का भेदभाव या बदसलूकी का सामना नहीं करना पड़ा। इस तरह की बातें देश में सौहार्द की मिशाल है। उन्होंने कहा कि ऐसे विवाद गैरजरूरी हैं। 

बरेली : हिन्दुस्तान में सभी रंगों के फूल
बीएचयू प्रकरण पर इस्लामिया गर्ल्स इंटर कॉलेज बरेली में संस्कृत पढ़ा रहीं डॉ साईमा अजमल ने कहा कि भाषा किसी धर्म विशेष से जुड़ी हुई नहीं होती है। हमारा हिन्दुस्तान एक ऐसा खूबसूरत गुलदस्ता है जिसमें सभी रंगों के फूल हैं। संस्कृत शुरू से ही उन्हें पसंद थी और छात्राएं भी उन्हें बेहद पसंद करती हैं। साईमा के निर्देशन में स्कूल की छात्राएं श्रीमद्भागवत गीता पर आधारित श्लोक प्रतियोगिता जीत चुकी हैं। हिंदी में पीएचडी करने वाली साईमा अब संस्कृत से भी पीजी करने जा रही हैं। उन्होंने वर्ष 2004 में इस्लामिया इंटर कॉलेज में नौकरी शुरू की थी। पढ़ाई के दौरान किसी कारण उन्हें बीए में संस्कृत नहीं मिल पाई थी। तब उन्होंने एक विषय से बाद में स्नातक स्तर पर संस्कृत की पढ़ाई की। 

गोरखपुर : संस्कृत हम सभी की भाषा
गोरखपुर। गोरखनाथ क्षेत्र में मोहम्मद इस्लाम के परिवार के पांच सदस्य संस्कृत की शिक्षा दे रहे हैं। परिवार का कहना है कि संस्कृत को किसी धर्म से न जोड़ें। यह भी अन्य भाषाओं की तरह ही है। गोरखपुर विश्वविद्यालय से संस्कृत में एमए मो. इस्लाम के परिवार में उनके पुत्र सादिक-उल-इस्लाम, बहू निकहत जहां, बेटियां अफरोज और शगुफ्ता इस्लाम ने भी संस्कृत पढ़ी।

मो. इस्लाम ने पहले गोरखपुर के मियां साहब इस्लामिया इंटर कॉलेज में संस्कृत पढ़ाई। सादिक समद इंटर कॉलेज में लेक्चरर के पद पर हैं। बेटी शगुफ्ता आजमगढ़ के निसवां इंटर कॉलेज में संस्कृत पढ़ा रही हैं। दूसरी बेटी अफरोज गोरखपुर इमामबाड़ा मुस्लिम गर्ल्स इंटर कॉलेज में संस्कृत की शिक्षिका हैं।

लखनऊ : मजहब की बंदिशें लगाना गलत
 लखनऊ के कालीचरन इंटर कॉलेज में उर्दू शिक्षक डॉ. हरि प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि भाषा संस्कृत हो या उर्दू, वह किसी मजहब या कौम की नहीं होती है। उसे कोई भी पढ़ सकता है और दूसरों को पढ़ा सकता है। भाषा में मजहब की बंदिशें नहीं होनी चाहिए। हिन्दू होते हुए मैंने गोरखपुर विश्वविद्यालय उर्दू में पीएचडी की और आज उर्दू पढ़ा भी रहा हूं। मेरा कभी किसी ने विरोध नहीं किया।

मुरादाबाद : शीनुल ने विवाद को गैर जरूरी ठहराया
मुरादाबाद मुस्लिम डिग्री कॉलेज में हिन्दी विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर शीनुल इस्लाम बीएचयू में पनपे विवाद को गैर जरूरी मानती हैं। शीनुल हिन्दी और संस्कृत में अलग-अलग पीएचडी करने के साथ ही मौलवी, मोअल्लिम और आचार्य की भी डिग्री ले चुकीं हैं। उन्होंने कहा कि शोध के दौरान निर्देशन भी हिन्दू शिक्षकों का रहा। हमें मजहबी रूढ़ियों के विरोध होने का अहसास तक कभी नहीं हुआ अलबत्ता सभी ने इस बात की सराहना की।

अलीगढ़ : एएमयू अध्यापकों ने इसे संकीर्ण मानसिकता बताया
एएमयू संस्कृत विभाग के पूर्व चेयरमैन प्रोफेसर खालिद बिन युसुफ का कहना है कि संस्कृत देववानी है। इसके प्रति इतनी संकीर्ण मानसिकता नहीं होनी चाहिए। धर्मो के बीच की दूरी को दूर करने के लिए मदरसों में भी संस्कृत भाषा को अनिवार्य कर देना चाहिए।

एएमयू धर्मशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर रेहान अख्तर का कहना है कि एएमयू में मुस्लिम छात्र-छात्राओं को रामायण और महाभारत का पाठ करने में कभी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हिन्दुइज्म के पहले अध्याय में छात्र-छात्राओं को यह अध्ययन कराया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां मुस्लिम विद्यार्थी महाभारत व रामायण का अध्ययन करने के बाद अपने धर्म की पढ़ाई करते है। एएमयू के संस्कृत विभाग में पाली भाषा पढ़ाई जाती है। बीते चार वर्षों से प्रोफेसर के रिटायर होने के बाद से दूसरे प्रोफेसर की नियुक्ति नहीं हुई है। 

कानपुर : मुस्लिम शिक्षिका ने उर्दू में लिखी रामायण
कानपुर में मुस्लिम शिक्षका माहे ने सांप्रदायिक सौहार्द्र और आपसी भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश करते हुए उर्दू में रामायण लिखी है। हिंदी से पीएचडी माहे चमनगंज स्थित जुबली गर्ल्स इंटर कॉलेज में हिंदी पढ़ाती हैं। माहे कहती हैं कि उनका उद्देश्य अपनी कलम के जरिये मानवता का संदेश देना है और किसी धर्म या जाति के बारे में वह नहीं सोचती हैं। हुमरा सुल्ताना ने अर्थववेद में पीएचडी की और वह डीपीएस कल्याणपुर में संस्कृत की शिक्षिका हैं। हुमरा ने भी बीएचयू में विरोध को गलत ठहराया है। 

प्रयागराज : विविधता ही हमारी पहचान
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में डॉ. संजय कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर हैं तो वहीं शहर के सबसे पुराने इंटर कॉलेज में एक एंग्लो बंगाली में पंडित अजय मालवीय उर्दू पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि विविधता ही हमारी पहचान है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ही संस्कृत विभाग की छात्रा सारा गुलशन हनीफ सनातन धर्म का आधार माने जाने वाले वेदों का अध्ययन कर रही हैं। उन्हें पढ़ाई में कोई परेशानी या भेदभाव नहीं झेलना पड़ा। 

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