अहिंसा और करुणा के पक्षधर थे संत विनोबा
हजारीबाग में संत विनोबा भावे की 131वीं जयंती पर गिरिजा सतीश ने उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विनोबा गांधी के सच्चे शिष्य थे और भूदान आंदोलन के माध्यम से समतामूलक समाज की स्थापना के लिए काम किया। उन्होंने छुआछूत और बलि प्रथा का विरोध करते हुए मानवता के लिए अपनी आजीवन प्रतिबद्धता दिखाई।

हजारीबाग, नगर प्रतिनिधि। संत विनोबा भावे की 131वीं जयंती पर लोक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष गिरिजा सतीश ने देश के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि वे महात्मा गांधी के सच्चे शिष्य थे। आजादी की लड़ाई लड़ने के बाद उन्होंने सत्ता को ठुकरा दिया और 13 वर्षों तक भारत के गांवों में कठिनाइयों के बीच पैदल यात्रा करते हुए भूदान जैसी क्रांतिकारी अवधारणा को क्रियान्वित किया।उन्होंने कहा कि भूदान आंदोलन में बड़े भूस्वामियों ने गरीबों और भूमिहीनों के लिए स्वेच्छा से जमीन दान कर समतामूलक समाज की स्थापना में योगदान दिया था। विनोबा जी को अनेक भाषाओं का ज्ञान था।
दर्शन-अध्यात्म का गहरा अध्ययन था और वे भगवद्गीता के मर्मज्ञ थे। विभिन्न धर्मों की अच्छी बातों का संकलन उन धर्मों पर लिखी उनकी किताबों में मिलता है।गिरिजा सतीश ने कहा कि संत विनोबा ने छुआछूत और बलि प्रथा का विरोध किया था, क्योंकि अहिंसा-करुणा आधारित उनकी सोच में सारी दुनिया का हित शामिल था।


