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पीएम बने पर एक भी दिन संसद नहीं गए 'भारत रत्न' चौधरी चरण सिंह, क्यों देना पड़ा था इस्तीफा

मोदी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने का ऐलान किया है। बता दें कि पांच महीने तक पीएम रहे चौधरी चरण सिंह एक भी दिन संसद नहीं जा सके थे।

पीएम बने पर एक भी दिन संसद नहीं गए 'भारत रत्न' चौधरी चरण सिंह, क्यों देना पड़ा था इस्तीफा
Ankit Ojhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 09 Feb 2024 01:24 PM
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मोदी सरकार ने किसान नेता और  पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह समेत तीन हस्तयों को भारत रत्न से सम्मानित करने का फैसला लिया है। पीएम मोदी ने खुद ऐलान किया और बताया कि पूर्व पीएम नरसिम्हा राव और हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामिनाथन को सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाएगा। बता दें कि चौधरी चरण सिंह को उनकी सादगी, उनके सफलतम राजनीतिक जीवन और किसानों के उत्थान के लिए जाना जाता है। वह आजादी की लड़ाई से लेकर आपातकाल तक में ऐक्टिव थे। हालांकि वह प्रधानमंत्री बनने के बाद एक भी दिन संसद नहीं जा पाए और पांच महीने के भीतर ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया। 

चौधरी चरण सिंह का जन्म यूपी के हापुड़ के पास नूरपुर में हुआ था। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली और फिर वकालत करने लगे। इसके बाद वह आजादी के आंदोलन में भी सक्रिय रहे। आपातकाल के बाद जब मोरारजी देसाई की सरकार बनी तो उन्होंने उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री का पद संभाला। हालांकि आपातकाल के बाद 1975में बनी मोरारजी देसाई की सरकार ज्यादा दिन नहीं चल पाई। 

पांच महीने में गिर गई थी चरण सिंह सरकार
मोरारजी देसाई की सरकार गिरने के बाद 1979 में चौधरी चरण सिंह कांग्रेस यू के समर्थन से प्रधानमंत्री बने। बताया जाता है कि इंदिरा गांधी चाहती थीं कि आपातकाल के बाद उनकी पार्टी के नेताओं पर जो केस दर्ज किए गए हैं वे वापस हो जाएं। हालांकि चौधरी चरण सिंह को यह बात स्वीकार नहीं थी। ऐसे में उन्होंने इंदिरा गांधी का समर्थन नहीं लिया। उन्होंने 5 महीने में ही अपना इस्तीफा दे दिया। ऐसे में वह एक दिन भी प्रधानमंत्री के रूप में संसद नहीं जा पाए। 

पंडित नेहरू की वजह से छोड़ दी थी कांग्रेस
चौधरी चरण सिंह के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से मतभेद थे। इसी वजह से उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी। राम मनोहर लोहिया और राजनारायण की मदद से उन्होंने 1967 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई थी। हालांकि एक साल में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। वह दोबारा यूपी के मुख्यमंत्री बने। 1946, 1952, 1962 और फिर 1967 में उन्होंने यूपी से विधानसभा चुनाव जीता। 

चौधरी चरण सिंह के पूर्वज भी आजादी के आंदोलन में सक्रिय थे। 1857 की क्रांति में भी उनके पूर्वजों ने हिस्सा लिया। वहीं 1929 में आजादी के लिए चौधरी चरण सिंह को भी जेल जाना पड़ा। 1940 में वह दोबारा जेल गए। हालांकि वह कांग्रेस के साथ जुड़े रहे और आजादी के लिए महात्मा गांधी के पदचिह्नों पर चलते रहे। बात 1952 की है जब जमींदारी उन्मूलन कानून के पास होने के बाद पटवारी हड़ताल करने लगे। 27 हजार पटवारियों ने इस्तीफा दे दिया और चौधरी चरण सिंह ने इसे स्वीकार कर लिया।

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