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हिंदी न्यूज़ देश'भारत जोड़ो यात्रा' में मालवा-निमाड़ पर राहुल गांधी का फोकस, कैसे डबल फायदा देख रही कांग्रेस?

'भारत जोड़ो यात्रा' में मालवा-निमाड़ पर राहुल गांधी का फोकस, कैसे डबल फायदा देख रही कांग्रेस?

मालवा-निमाड़ अंचल की इन 35 सीट पर जीत के साथ कांग्रेस ने तब प्रदेश में कुल 114 सीट का आंकड़ा छुआ था और 15 साल बाद प्रदेश में सत्ता में वापसी की थी। 22 विधायकों के इस्तीफे के कारण सरकार गिर गई।

'भारत जोड़ो यात्रा' में मालवा-निमाड़ पर राहुल गांधी का फोकस, कैसे डबल फायदा देख रही कांग्रेस?
Madan Tiwariभाषा,भोपालSun, 27 Nov 2022 07:49 PM
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मध्य प्रदेश के राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मालवा-निमाड़ अंचल ने 15 साल के अंतराल के बाद 2018 में कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता में लाने में एक अहम भूमिका निभाई थी। अब, पार्टी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए राहुल गांधी के नेतृत्व में की जा रही 'भारत जोड़ो यात्रा' का उपयोग कर रही है। मध्य प्रदेश में राहुल गांधी का काफी फोकस इस क्षेत्र पर है। कांग्रेस नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों के एक वर्ग के अनुसार, मध्य प्रदेश से यात्रा के गुजरने के दौरान मालवा-निमाड़ अंचल पर ध्यान केंद्रित करने से पार्टी को जमीनी स्तर पर अपने संगठन में नई जान फूंकने में मदद मिलेगी तथा इससे चुनावी लाभ भी मिलेगा। पार्टी इसके जरिए 2023 और 2024 के चुनावों में फायदा भी देख रही है।

66 सीटें मालवा-निमाड़ से
राज्य विधानसभा की कुल 230 सीट में 66 सीट मालवा-निमाड़ अंचल में हैं, जिनमें से 22 सीट अनुसूचित जनजाति और 9 सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इस अंचल के राजनीतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी मालवा-निमाड़ क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को जीत कर राज्य में सत्ता बरकरार रखने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। राज्य में 23 नवंबर को बुरहानपुर जिले में पहुंची 'भारत जोड़ो यात्रा' प्रदेश में कुल 12 दिनों तक जारी रहेगी और इस दौरान यह यात्रा केवल मालवा-निमाड़ अंचल से ही गुजरेगी। 

कांग्रेसी नेताओं का यात्रा पर क्या कहना है? 
हालांकि, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यात्रा का उद्देश्य चुनावी लाभ लेना नहीं है, लेकिन मध्य प्रदेश में पार्टी के नेताओं द्वारा यात्रा के लिए निर्धारित किया गया मार्ग स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि पदयात्रा मालवा-निमाड़ अंचल पर केंद्रित है। यात्रा मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल के बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन जिलों से गुजरने के बाद इंदौर जिले में पहुंची है। इसके बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यह इसी अंचल के उज्जैन और आगर मालवा जिलों से गुजरेगी और उसके बाद चार दिसंबर को राजस्थान में प्रवेश करेगी। 

बीजेपी भी निकाल रही 'गौरव यात्रा'
खंडवा जिले के बड़ौदा अहीर में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व वाली 'भारत जोड़ो यात्रा' के 24 नवंबर को पहुंचने से महज एक दिन पहले, राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टंट्या भील की जन्मस्थली पर पहुंचकर उनके सम्मान में निकाली जा रही 'गौरव यात्रा' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। भाजपा की प्रदेश इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हमारी पार्टी न केवल मालवा-निमाड़ पर, बल्कि पूरे राज्य पर ध्यान केंद्रित कर रही है और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा, ''हमारी पार्टी न केवल मालवा-निमाड़ क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रही है, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी लोगों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए काम कर रही है।'' 

पिछले चुनाव में बीजेपी को मिली थीं इतनी सीटें
अग्रवाल ने कहा कि राज्य में छह जनजाति गौरव यात्राएं निकाली जा रही हैं और पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) अधिनियम (पेसा एक्ट) के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक अलग यात्रा भी चल रही है। भाजपा नेता ने दावा किया, ''भारत जोड़ो यात्रा को लोगों का ज्यादा समर्थन नहीं मिल रहा है और इससे कांग्रेस पार्टी को कोई फायदा नहीं होगा।'' पिछले विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ अंचल की 66 सीट में कांग्रेस ने 35 पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा को 28 सीट मिली थी और तीन सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे। 

मालवा-निमाड़ में कांग्रेस ने जीती थीं 35 सीटें
मालवा-निमाड़ अंचल की इन 35 सीट पर जीत के साथ कांग्रेस ने तब प्रदेश में कुल 114 सीट का आंकड़ा छुआ था और 15 साल बाद प्रदेश में सत्ता में वापसी की थी। हालांकि, मार्च 2020 में पार्टी के 22 विधायकों के इस्तीफे के कारण कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिर गई। उसके बाद 2020-2021 में हुए उपचुनावों के बाद इस अंचल में भाजपा की सीट बढ़ कर 33 हो गई, जबकि कांग्रेस के कब्जे वाले सीट की संख्या घटकर 30 रह गई। 

कांग्रेस को उम्मीद, 2024 में भी होगा फायदा
वहीं, 2013 के विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ में भाजपा ने 56, कांग्रेस ने 9 और निर्दलीय उम्मीदवार ने एक सीट जीती थी। प्रदेश कांग्रेस महासचिव जेपी धनोपिया ने बताया कि यात्रा का असर मालवा-निमाड़ अंचल के शाजापुर, देवास, बड़वानी, झाबुआ, धार, अलीराजपुर, रतलाम, मंदसौर और नीमच सहित अन्य जिलों में भी देखने को मिलेगा। धनोपिया ने कहा कि इससे पार्टी को न केवल राज्य में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों में, बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी फायदा होगा।