बंगाल चुनाव: ध्रुवीकरण को लेकर जोर आजमाइश, अपने एजेंडे पर कायम BJP
पश्चिम बंगाल में भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में सीएए लागू करने का वादा कर साफ कर दिया है कि वह राज्य में अपने एजेंडे पर पूरी तरह कायम है और उसमें कोई बदलाव नहीं आया है। पार्टी के चुनाव प्रचारक भी...

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में सीएए लागू करने का वादा कर साफ कर दिया है कि वह राज्य में अपने एजेंडे पर पूरी तरह कायम है और उसमें कोई बदलाव नहीं आया है। पार्टी के चुनाव प्रचारक भी अपने अभियान में इस पर जोर दे रहे हैं। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है इससे सामाजिक ध्रुवीकरण तेज हो सकता और ममता बनर्जी के खिलाफ उसकी रणनीति को मजबूती मिलेगी।
पश्चिम बंगाल के चुनावी राजनीति में भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में वैसे तो तमाम बड़े वादे किए हैं, लेकिन उसका सबसे ज्यादा जोर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लागू करने पर है। हालांकि अभी इस कानून के नियम कायदे तक नहीं बने हैं, लेकिन यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर बीते डेढ़ साल से देशभर में राजनीति हो रही है।
पश्चिम बंगाल का चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस से सीधे मुकाबले की स्थिति में भाजपा को राजनीतिक और सामाजिक समीकरण साधने की बेहद जरूरत है और वह ऐसे में उन मुद्दों को उठा रही है जिससे ध्रुवीकरण उसके पक्ष में हो। यही वजह है कि सीएए का मुद्दा पांच विधानसभा चुनावों में से सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल में ही उठ रहा है। उनका मानना है कि ममता बनर्जी अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही हैं और इसके जवाब में भाजपा भी अपना अभियान चला रही है।
भाजपा का मानना है कि पश्चिम बंगाल के लोगों की जो भावना है, वह उसके साथ है। इससे उसे लोगों को अपने पक्ष में खड़ा करने में सफलता हासिल होगी। हालांकि राज्य में नेतृत्व को लेकर भाजपा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है, लेकिन बदलाव का माहौल बनाकर वह इससे आगे निकालने की कोशिश कर रही है। भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही राज्य में बदलाव का माहौल बनाया हुआ है। इसे वह मतदान तक कायम रखने में जुटी है, जिससे उसकी सफलता लोकसभा चुनावों से भी आगे जा सके और वह सत्ता तक अपनी पहुंच बना सके। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य में 18 सीटें जीती थीं।


