बीसीआई अध्यक्ष मनन मिश्रा का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
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नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) की महासभा (जनरल काउंसिल) की बैठक में बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की औपचारिक मांग की गई। साथ ही मिश्रा के लंबे कार्यकाल की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। जनरल काउंसिल की बैठक के दौरान केरल से बीसीआई सदस्य अधिवक्ता मनोज कुमार नरेंद्रन ने मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग उठाई। उनकी इस मांग का समर्थन उत्तर प्रदेश के एक अन्य बीसीआई सदस्य अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने भी किया। इसके अलावा, बीसीआई के सह अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता सदाशिव रेड्डी ने पत्र लिखकर बीसीआई अध्यक्ष मनन मिश्रा से इस्तीफे की मांग की। रेड्डी काउंसिल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे。
पद से हटाने की मांग
बीसीआई अध्यक्ष मिश्रा को भेजे 6 पन्नों के पत्र में सह अध्यक्ष रेड्डी ने इस्तीफे की मांग के अलावा गंभीर आरोप भी लगाए हैं। केरल से बीसीआई के सदस्य मनोज कुमार नरेंद्रन ने भी बीसीआई अध्यक्ष को पत्र लिखा है। इसमें भारतीय विधिज्ञ परिषद के मौजूदा कामकाज, खासकर अध्यक्ष के लीडरशिप पर गहरा असंतोष जताया गया है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कहा है कि किसी एक व्यक्ति की इतनी लंबी लीडरशिप उस कानूनी संस्था के लिए ठीक नहीं है, जो लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व, सामूहिक जिम्मेदारी और संस्थागत फैसले लेने की प्रक्रिया पर आधारित है। वरिष्ठ अधिवक्ता मिश्रा पिछले 14 साल से बीसीआई के अध्यक्ष हैं।
स्वतंत्र समिति बनाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर भारतीय विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल की वैधता को चुनौती दी गई है। शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है। अधिवक्ता योगमाया एमजी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा पहली बार 2012 में बीसीआई के अध्यक्ष चुने गए थे। हालांकि, मिश्रा ने 2014 में कुछ समय के लिए पद छोड़ दिया था, लेकिन उसी साल नवंबर में वे दोबारा से अध्यक्ष बन गए और तब से पद पर बने हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में बताया गया है कि बीसीआई के नियम 12(2) के तहत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल दो साल का होता है, या सदस्यता खत्म होने तक (जो भी पहले हो) होता है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज या हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई है। साथ ही, समिति की मदद के लिए कैग द्वारा नामित ऑडिटर और आर्थिक और तकनीकी विशेषज्ञ हो सकते हैं। याचिका में 21 अप्रैल 2025 के उस गजट नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है जो मिश्रा का कार्यकाल 2030 तक बढ़ाता है। याचिका में कहा गया है कि कोई प्रशासनिक अधिसूचना बीसीआई को चलाने वाले कानूनी ढांचे से ऊपर नहीं हो सकता।


