बीसीआई ने अधिवक्ता अधिनियम में किया बड़े बदलाव का प्रस्ताव
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने 'अधिवक्ता अधिनियम संशोधन विधेयक, 2026' का मसौदा पेश किया है जिसमें महिलाओं के लिए कानूनी प्रतिनिधित्व और वकीलों की सामाजिक सुरक्षा के उपाय शामिल हैं। इसके तहत महिला वकीलों की संख्या बढ़ाने और आर्थिक सहायता के लिए फंड बनाने का भी प्रस्ताव है।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने ‘अधिवक्ता अधिनियम संशोधन विधेयक, 2026’ का मसौदा पेश किया है। इसमें महिलाओं के लिए कानूनी तौर पर प्रतिनिधित्व और वकीलों के लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान है। बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के हस्ताक्षर वाले और कानूनी बिरादरी को भेजे गए एक सर्कुलर में कहा गया कि बीसीआई ने एक मसौदा तैयार किया है। यह भारतीय वकीलों की सुरक्षा, संगठित बार को मजबूत करने और कानूनी पेशे के लिए नए मौके बनाने की दिशा में पेशे को प्राथमिकता देने वाला एक ऐतिहासिक सुधार है। बीसीआई ने राज्य बार काउंसिल्स (एसबीसी) में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में काफी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है।जिन
काउंसिल्स में मतदाताओं की संख्या 10,000 से ज्यादा है, वहां सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 33 करने का प्रस्ताव है। इसमें चार चुनी हुई महिला सदस्य और बार एसोसिएशन की सलाह पर तीन और महिला वकीलों को शामिल करने का प्रावधान है। मसौदे में भौगोलिक रूप से पिछड़े इलाकों के प्रतिनिधित्व को पक्का करने के लिए ‘को-ऑप्शन’ का तरीका अपनाया गया है, क्योंकि अक्सर एसबीसी चुनावों में इन इलाकों का प्रतिनिधित्व नहीं हो पाता है। मसौदा अधिनियम में खास फंड और ट्रस्ट बनाने का प्रस्ताव है। ये फंड काबिल वकीलों को आर्थिक मदद, पेंशन, इंश्योरेंस, मेडिकल राहत देंगे और जरूरतमंद व दिव्यांग वकीलों की मदद करेंगे।
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