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Battle of Longewala 1971: जब पाक के 3000 सैनिकों और टैंकों से भिड़े थे भारत के 120 जवान, 30 के बराबर एक निकला

Battle of Longewala 1971: बात 52 साल पहले आज ही के दिन की है। जब बांग्लादेश अलग होने से बौखलाया पाकिस्तान भारतीय हिस्सों पर कब्जा करना चाहता था। 3000 पाकिस्तानी सैनिकों ने टैंकों से हमला बोल दिया था।

Battle of Longewala 1971: जब पाक के 3000 सैनिकों और टैंकों से भिड़े थे भारत के 120 जवान, 30 के बराबर एक निकला
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 07 Dec 2023 09:56 AM
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India Pakistan Longewala War 1971: बात 1971 की है, जब भारत ने पाकिस्तान के दो टुकड़े करके बांग्लादेश बना लिया था। भारत के इस कदम से पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति याहया खान काफी उखड़े हुए थे। पूर्वी पाकिस्तान को अभी भी भारत सरकार मदद कर रहा था। ऐसे में पाकिस्तान ने सोचा कि थार रेगिस्तान के जरिए वो भारत पर हमला कर देगा। पाकिस्तान की योजना लोंगेवाला पोस्ट के जरिए भारत के पश्चिमी हिस्से पर कब्जा जमाने की थी। जब पाकिस्तान ने साजिश के तहत अपने 3000 सैनिकों, 45 टैंकों और भारी भरकम गोला-बारूद के साथ लोंगेवाला की तरफ बढ़ना शुरू किया तो सामने उसे मिले- 120 जवान। पाकिस्तान ने सोचा कि वह आसानी से पोस्ट पर कब्जा कर लेगा लेकिन, उसने सपने में भी नहीं सोचा कि उसे ऐसी करारी हार झेलनी पड़ेगी जो पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी। बताया जाता है कि लोंगेवाला के युद्ध में पाकिस्तान के इतने टैंक बर्बाद हो गए कि द्वितीय विश्व यु्द्ध के बाद पहली बार किसी देश ने इतनी तबाही झेली।

1971 का लोंगेवाला युद्ध तीन दिन चला। 4 दिसंबर को पाकिस्तान ने भारतीय पोस्ट लोंगेवाला पर हमला बोल दिया था। 7 दिसंबर को भारत की ऐतिहासिक फतह ने इस युद्ध को समाप्त किया। इस जंग में भारत के दो जवान शहीद हुए थे। जबकि पाकिस्तान को अपने 200 सैनिकों की जान गंवानी पड़ी। यह इस युद्ध के नायक थे- मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी। जिनकी सूझबूझ से भारत ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए थे।

जब पता लगा, तेजी से आ रही पाकिस्तानी आर्मी 
बांग्लादेश बन जाने के बाद बदला लेने के जल-भुन रहा पाकिस्तान भारत के पश्चिमी हिस्से पर कब्जा जमाने की नीयत से धावा बोलने वाला था। दिन था 4 दिसंबर 1971। लोंगेवाला पोस्ट पर उस वक्त  12वीं इंफ्रेंट्री डिविजन की 23 पंजाब कंपनी-A तैनात थी। इसकी कमान मेजर चांदपुरी के पास थी। 4 दिसंबर को धरमीर भान की प्लाटून को सीमा पर कुछ शोर सुनाई दिया। चेक करने पर पता लगा कि काफी तेजी से पाकिस्तानी आर्मी उनकी तरफ बढ़ रही थी। बिना देरी किए एयरक्राफ्ट में मेजर आत्मा सिंह ने उड़ान भरी। 20 किलोमीटर के राउंड में उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी को भांप लिया और वापस पोस्ट पर सूचना दी।

हेजक्वार्टर ने कहा- खुद ही लड़नी होगी जंग
पाकिस्तान की तरफ से 3000 सैनिक, 40-45 टैंक, एक फील्ड रेजिमेंट और दो आर्टिलरी बैटरी लोंगेवाला की तरफ तेजी से बढ़ रहे थे। वहीं, लोंगे वाला पोस्ट पर मेजर चांदपुरी के पास थे- 2 मीडियम मशीन गन, 81 मिमी के दो मार्टार, 4 रॉकेट लॉन्चर्स, 2 आरसीएल गन के साथ 120 जवानों की फौज। मेजर चांदपुरी ने तुरंत हेडक्वार्टर पर सूचना दी। सामने से कहा गया कि लड़ाई अभी खुद ही लड़नी होगी। सुबह तक वायुसेना पहुंच जाएगी और कुछ मदद भी। 

बारूदी सुरंग में शहीद हुआ एक जवान
अब भारतीय जवानों के पास ज्यादा वक्त नहीं था तो चांदपुरी के नेतृत्व में जवानों ने तुरंत बारूदी सुरंग डालनी शुरू कर दी। इस हड़बड़ी में एक जवान शहीद हो गया। हालांकि जब पाकिस्तानी आर्मी इस तरफ आई तो उसके दो टैंक और जीप उड़ गए। एक पाकिस्तानी सैनिक भी मारा गया और दर्जनों सैनिक घायल हो गए। यह जंग की शुरुआत थी। इसके बाद चांदपुरी के नेतृत्व में जवानों ने पाकिस्तानी टैंकों को निशाना बनाना शुरू किया।

चांदपुरी ने संभाली कमान
पाकिस्तान को धूल चटाने के लिए चांदपुरी ने PIATs से टैंकों को उड़ाना शुरू किया। मेजर चांदपुरी ने अपने कंधे पर रखकर पाकिस्तान के कई टैंकों को नष्ट कर दिया। इस दौरान कई पाकिस्तानी जवान भी मारे गए। पाकिस्तान शुरुआत से ही चांदपुरी की रणनीति नहीं समझ पाया। चांदपुरी की टीम युद्ध में बेहतर पोजिशन पर थी। पाकिस्तानी सैनिकों को समझ ही नहीं आ रहा था कि उन पर हमला कहां और कैसे हो रहा है। इस बीच चांदपुरी लगातार हेडक्वार्टर पर जानकारी दे रहे थे। छोटे और सीमित हथियारों के साथ 120 जवानों ने पाकिस्तानियों को धूल चटा दी।

सुबह होते ही वायुसेना ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए
रात भर पाकिस्तानियों को छकाने के बाद सुबह होते ही वायुसेना के फाइटर जेट्स ने पाकिस्तानियों को चुन-चुनकर मारना शुरू कर दिया। भारतीय फाइटर जेट हवा में आते और पाकिस्तानी टैंकों को उड़ा देते। भारतीय वायुसेना और चांदपुरी की टीम ने तीन दिनों तक पाकिस्तान को आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया और नतीजन पाकिस्तानी सैनिकों को उल्टे पैर भागना पड़ा।

विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी देश को इतना नुकसान हुआ
तीन दिनों तक चले इस युद्ध में भारतीय जवानों ने पाकिस्तान के 45 टैंकों को बर्बाद कर दिया। ऐसा बताया जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी देश ने इतने बड़ी संख्या में टैंकों को खोया। इस युद्ध के बाद ब्रिटिश टीफ ऑफ द इंपीरियल जनरल स्टाफ फील्ड मार्शन आरएम करवर ने लोंगेवाला पहुंचकर चांदपुरी से मुलाकात भी की और युद्ध की बारीकियों को सीखा।

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