क्रांतिकारियों ने जला दिया था मुहाफिजखाना
अगस्त क्रांति के दौरान बरेली में कई क्रांतिकारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने आंदोलन की तैयारी की, जबकि ताराचंद रस्तोगी और उनके साथियों ने मुहाफिजखाना में आग लगा दी। 10 अगस्त को कई कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद छात्रों ने मोर्चा संभाला। मोहन सिंह बंदा ने भी आंदोलन में भाग लिया।

अगस्त क्रांति की यादें : अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान खूब गरजी थी बरेली ताराचंद रस्तोगी, इकराम आदि ने कचहरी स्थित मुहाफिजखाना को लगाई थी आग
बरेली, मुख्य संवाददाता।
अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बरेली भी खूब गरजी थी। बरेली में क्रांतिकारियों ने कचहरी स्थित मुहाफिजखाना में आग लगा दी थी। रेल की पटरियां भी उखाड़ दी थीं। आज ये घटनाएं कागजों में दर्ज हैं।
आंदोलन की तैयारी
कांग्रेस कार्यसमिति ने नौ अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा की थी, लेकिन आंदोलन की तैयारी पहले से ही हो चुकी थी। 14 जुलाई 1942 को पंडित गोविंद बल्लभ पंत इसी आंदोलन की तैयारी के लिए बरेली आए थे। मोती पार्क में एक कार्यक्रम हुआ, जिसमें गोविंद बल्लभ पंत ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पारित प्रस्ताव की जानकारी दी थी। लेखक सुधीर विद्यार्थी ने अपनी पुस्तक बरेली एक कोलाज में बरेली में भारत छोड़ो आंदोलन का विस्तार से जिक्र किया है। इसी किताब में मुहाफिजखाने की आग का भी वर्णन है। 1942 में मलूकपुर के पास एक विशाल जनसभा हुई। इसमें मौलाना मोहम्मद अली, शौकत अली और उनकी मां ने जोरदार भाषण दिया था। भाषण को सुनकर ताराचंद रस्तोगी, उनके मित्र इकराम हुसैन और विश्वेश्वर दयाल मिश्र ने कुछ बड़ा करने का संकल्प लिया। बरेली की कचहरी स्थित मुहाफिजखाना में रात को गोरखा सिपाही का पहरा लगा रहता था। तीनों लोगों ने इसमें आग लगाने की योजना बनाई। गोरखा सिपाही को बातों में उलझा कर इकराम ने पेट्रोल से भरा कनस्तर ताराचंद रस्तोगी के हाथ से लेकर उन्हें अपने कंधे पर चढ़ा लिया। रोशनदान के जरिए पेट्रोल से भीगा रस्सा अंदर डालकर उसमें आग लगा दी। देखते ही देखते पूरा मुहाफिजखाना धू-धू कर जलने लगा। इस पूरी कार्रवाई में कलेक्ट्रेट के एक कर्मचारी पीडी जोशी का बड़ा योगदान रहा। उन्हें 11 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें सजा भी हुई थी। क्रांतिकारियों ने कुछ दिन बाद रेल की पटरी भी उखाड़ दी थी।
गिरफ्तारी की घटनाएं
10 अगस्त को हुईं गिरफ्तारियां
10 अगस्त को सुबह आठ बजे ही बरेली के कई प्रमुख कांग्रेसी नेताओं को पकड़ लिया गया था। इनमें धर्मदत्त वैद्य, पंडित दीनानाथ मिश्र, दामोदर स्वरूप सेठ, दरबारी लाल शर्मा, चिरंजीव लाल गुप्ता आदि शामिल थे। इन सभी को भारत रक्षा कानून के अंतर्गत गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। कांग्रेसी नेताओं के पकड़ जाते ही छात्रों ने आगे बढ़कर मोर्चा संभाल लिया। छात्र नेताओं में सतीश चंद्र और प्रकाश चंद आजाद प्रमुख थे।
स्वतंत्रता सेनानी मोहन सिंह बंदा
मोहन सिंह बंदा ने खाईं लाठियां
बरेली में एक स्वतंत्रता सेनानी मोहन सिंह बंदा थे। उन्होंने 12 अगस्त 1942 को बीच बाजार में धारा 144 तोड़ कर पुलिस की लाठियां खाईं और भारत मां की जय का उद्घोष किया। 1942 के बड़े आंदोलनकारियों में मुंशी ऊधौनारायण भी थे। 1920 में गांधीजी के बरेली आने पर उन्हें आजादी की लड़ाई में शामिल होने की प्रेरणा मिली थी। वो नमक सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में जबर्दस्त तरह से सक्रिय रहे।


