खाते के प्रोफाइल से मेल न खाने वाला लेनदेन तुरंत रुकेगा
- एक हजार रुपये से अधिक की संदिग्ध धनराशि खाते में ट्रांसफर हुई तो लेनदेन होगा बंद, देना होगा जवाब। बैंक हर खाताधारक की वित्तीय प्रोफाइल तैयार करेंगे। नए नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे, जिनमें संदिग्ध लेनदेन की पहचान पर सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

- एक हजार से अधिक की भी संदिग्ध धनराशि खाते में ट्रांसफर हुई तो लेनदेन होगा बंद, देना होगा जबाव - हर खाताधारक की वित्तीय प्रोफाइल तैयार करेंगे बैंक, संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल बंद होगा लेनदेन
नई व्यवस्था में मुख्य पहलू
- आरबीआई ने बैंकों को पुख्ता निगरानी रखने का दिया निर्देश, नए नियम अगले वर्ष एक अप्रैल से होंगे लागू
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। साइबर धोखाधड़ी के जरिए अवैध कमाई गई धनराशि पर पुख्ता निगरानी रखने के लिए बैंकिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इस बदलाव के तहत बैंक हर ग्राहक की वित्तीय प्रोफाइल के हिसाब से लेनदेन पर नजर रखेंगे। अगर अचानक से किसी खाते में ग्राहक की हैसियत से ज्यादा का लेनदेन होता है तो बैंक एक निर्धारित अवधि के लिए फ्रीज कर देगा。
नए नियमों की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारतीय रिजर्व बैंक ने म्यूल (फर्जी) खातों को पकड़ने के लिए नई व्यवस्था का मसौदा जारी किया है। इसके तहत बैंक को किसी खाते में मनी म्यूल गतिविधि या साइबर धोखाधड़ी से जुड़ा संदिग्ध लेनदेन मिलने पर संबंधित राशि या खाते पर अस्थाई रूप से रोक लगाने का अधिकार होगा, जिसके साथ ही खाताधारक को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। नई व्यवस्था एक अप्रैल 2027 से अनिवार्य तौर पर लागू होगी लेकिन अगर कोई बैंक चाहता है तो वह पहले भी लागू कर सकता है।
नए मसौदे के तहत एक हजार रुपये या इससे अधिक के ऐसे लेनदेन को संदिग्ध माना जा सकता है, जिन्हें बैंक की लेनदेन निगरानी प्रणाली संदिग्ध मनी म्यूल गतिविधि या साइबर धोखाधड़ी की रकम के तौर पर चिन्हित करे। फर्जी तरीके से होने वाले लेनदेन की पहचान करने के लिए बैंक एआई और मशीन लर्निंग आधारित प्रणालियों का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। बैंक को अधिकार होगा कि वह किसी खाते के सामान्य लेनदेन से बहुत अलग या खाताधारक की घोषित प्रोफाइल की तुलना में असामान्य लेनदेन होने पर भी बैंक उसे संदिग्ध मान सकता है। इसके साथ ही, किसी ऐसे खाते से लेनदेन हुआ जो साइबर धोखाधड़ी में जुटाई गई अवैध धनराशि को रखने या ट्रांसफर करने में शामिल है तो उस स्थिति में भी लेनदेन रोक सकेगा।
बैंकों में शिकायत निपटारा
---------------
शिकायतों के लिए बैंकों में नोडल अधिकारी होंगे
हर बैंक को क्षेत्रीय, जोनल या मुख्यालय स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने होंगे। इन अधिकारियों के नाम, फोन नंबर, पता और ई-मेल बैंक की वेबसाइट तथा सभी शाखाओं में प्रमुखता से प्रदर्शित करने होंगे। नई व्यवस्था सभी वाणिज्यिक बैंकों, जिनमें लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और स्थानीय क्षेत्र बैंक शामिल होंगे। नोडल खातों, पूल खाते, एस्क्रो खाते और लाभांश तथा शेयर पूंजी जैसे विशेष उद्देश्य वाले खातों पर यह प्रक्रिया लागू नहीं होगी।
------------
नए नियमों के प्रावधान
नई व्यवस्था के तहत कई अहम प्रावधान
- संदिग्ध लेनदेन या खाते की पहचान होने पर बैंक को तत्काल अस्थाई तौर पर लेनदेन रोकना होगा।
- बैंक को खाताधारक को रोक लगाने का कारण, उसे हटाने की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारी का संपर्क विवरण देना होगा।
- बैंक के पास मोबाइल नंबर या ई-मेल उपलब्ध है तो डिजिटल माध्यम से तत्काल सूचना देनी होगी अन्यथा अगले कार्य दिवस की समाप्ति तक सूचना देना जरूरी होगा।
- खाताधारक को संदिग्ध लेनदेन या खाते की वास्तविकता स्पष्ट करने के लिए 20 दिन का समय दिया जाएगा। बैंक को जवाब मिलने के बाद उसकी जांच करनी होगी।
- जांच के बाद बैंक को अधिकतम 30 दिन के भीतर फैसला लेना होगा। यदि खाते को संदिग्ध मानने का आधार नहीं मिलता है तो रोक हटनी होगीी।
- संदेह बरकरार रहने पर बैंक को मामला राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (एनसीआरपी-सीएफसीएफआरएमएस) को भेजना होगा।
------------
बैंकिंग नियमों का पालन
जांच एजेंसी से जबाव नहीं तो 31वें दिन हटेगी रोक
नए नियमों के तहत बैंक द्वारा जांच एजेंसी व पुलिस को मामले भेजने की तिथि से 30 दिन के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि इस अवधि में कोई वैधानिक निर्देश नहीं मिलता है तो बैंक 31वें दिन लेनदेन से जुड़ी रोक हटा लेगा। यानी बैंक द्वारा खाते पर अस्थायी रोक की अधिकतम अवधि 60 दिन होगी। इसमें बैंक की शुरुआती जांच के लिए 30 दिन और कानून प्रवर्तन एजेंसी या सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई के लिए 30 दिन शामिल हैं।
------------
बैंक का नियंत्रण और जिम्मेदारी
निगरानी के लिए बैंकों को करने होंगे ठोस उपाय
आरबीआई ने कहा कि बैंकों को ऐसी तकनीकी व्यवस्था भी तैयार करनी होगी जो मनी म्यूल और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की पहचान कर सके। साथ ही, वास्तविक ग्राहकों के खातों को गलती से संदिग्ध श्रेणी में डालने का जोखिम कम करने के लिए सही मानकों पर लेनदेन की जांच करनी होगी। ऐसे में बैंक को प्रत्येक मामले का केंद्रीकृत रिकॉर्ड रखना होगा, जिसमें रोक लगाने की तारीख और कारण, खाताधारक को भेजी गई सूचनाएं, उसके जवाब, पुलिस या अन्य एजेंसी को भेजे गए संदर्भ, उस पर मिलने निर्देश और रोक हटाने की जानकारी दर्ज करनी होगी। ऐसे रिकॉर्ड को कम से कम पांच वर्षों तक सुरक्षित रखना होगा। यदि खाता बंद हो जाता है तो रिकॉर्ड को खाता बंद होने की तारीख से कम से कम 10 साल तक रखना होगा।
-----------------
साइबर धोखाधड़ी के आंकड़े
खाता धारकों पर रहेगी नजर
अगर किसी व्यक्ति का साइबर धोखाधड़ी में शामिल होने पर खाता बंद हो जाता है तो ऐसे खातों और खाताधारक के अन्य सक्रिय खातों पर भी बैंक द्वारा अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी। नई प्रक्रिया से बैंकों की संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट यानी एसटीआर दाखिल करने की मौजूदा जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। बैंक को नियमों के अनुसार संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट वित्तीय खुफिया इकाई-भारत को देनी होगी।
------------
साइबर धोखाधड़ी की गंभीरता
साइबर धोखाधड़ी बड़ी चुनौती
आंकड़े बताते हैं कि देश में साइबर धोखाधड़ी के नाम पर लोगों को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। आंकड़ों से पता चलता है कि बीते पांच वर्षों में 55659 करोड़ से अधिक की साइबर धोखाधड़ी हुई है। जबकि एक करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी को जोड़ दिया जाए तो यह धनराशि कहीं अधिक बैठती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1330 मामले में 46559.84 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जिसमें रिकवरी महज 2788.38 करोड़ रुपये की हुई। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई को साइबर ठगी पर सख्त नियम बनाने के निर्देश दिए।


