बखिरा झील का ईको टूरिज्म प्रोजेक्ट जल्द ही भरेगा उड़ान, शासन ने मांगी रिपोर्ट
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले की बखिरा झील की तस्वीर बदलने वाली बहुप्रतीक्षित ईको-टूरिज्म
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले की बखिरा झील की तस्वीर बदलने वाली बहुप्रतीक्षित ईको-टूरिज्म परियोजना अब कागजों से निकलकर धरातल पर नजर आएगी। झील को विश्वस्तरीय ईको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए डीएम आलोक कुमार की ओर से भेजे गए नवीन प्रस्ताव पर पर्यटन निदेशालय ने गंभीरता दिखाई है। परियोजना के लिए करीब 15 एकड़ भूमि खरीदने और इसके लिए 13.74 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव पर शासन स्तर से कार्रवाई शुरू हो गई है। खास बात यह है कि अब जिला प्रशासन से सरकारी और निजी दोनों तरह की जमीन का पूरा हिसाब तलब किया गया है। इसके लिए निदेशक पर्यटन ईको पुष्प कुमार ने 02 सितंबर 2026 को डीएम को पत्र भेजा गया है। जिसमें जिला प्रशासन से परियोजना के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता संबंधी विस्तृत आख्या मांगी गई है。
सरकारी जमीन का भी मांगा हिसाब
अब प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि परियोजना के लिए कितनी सरकारी जमीन उपलब्ध है और कितनी भूमि निजी स्तर पर खरीदनी पड़ेगी। शासन की इस कवायद को परियोजना की वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकारी जमीन उपलब्ध होने की स्थिति में निजी भूमि खरीद की आवश्यकता और लागत का भी आंकलन किया जाएगा। यानी अब परियोजना की राह में सबसे अहम पड़ाव भूमि की उपलब्धता और उसकी स्थिति स्पष्ट होना है। गौरतलब है कि बखिरा झील को वैश्विक पहचान दिलाने और ईको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने के लिए डीएम आलोक कुमार ने 19 जून 2026 को नए सिरे से डीपीआर शासन को भेजा था। बखिरा झील के समग्र विकास के लिए करीब 42 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भेजी गई है। जिसमें 13.74 करोड़ रूपये जमीन क्रय के लिए शामिल है। इसके कुछ ही दिन बाद 25 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बैजूनाथ धाम से बखिरा झील को ईको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित कर वैश्विक पहचान दिलाने की बात की थी। अब पर्यटन निदेशालय की सक्रियता से इसको जमीन पर उतारने की उम्मीद मजबूत हुई है। अब यह परियोजना धरातल पर उतरती है तो बखिरा झील पूर्वांचल के प्रमुख ईको टूरिज्म स्थलों में शामिल हो सकेगा। वहीं, इससे पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार, कारोबार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।
1990 से पक्षी विहार, 2021 में मिला रामसर साइट का दर्जा
मगहर स्थित संतकबीर दास की महापरिनिर्वाण स्थली से करीब 20 किलोमीटर दूर बखिरा झील वर्ष 1990 से पक्षी विहार है। 29 जून 2021 को इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट का दर्जा भी मिला। इसके बावजूद लंबे समय से इसके समग्र पर्यटन विकास की मांग अधूरी थी।
तामेश्वरनाथ कॉरिडोर निर्माण को 2.85 एकड़ भूमि क्रय को 05 करोड़ की मांग
सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक साल पहले जिले के प्रसिद्ध तामेश्वरनाथ धाम को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की घोषण की थी। इसकी भी कवायद तेज हो गई है। कॉरिडोर निर्माण के लिए 2.85 एकड़ भूमि अधिग्रहण की जानी है और इसके मुआवजे के लिए 05 करोड़ रुपये की जरूरत है। डीएम की ओर से भेजे गए भूमि क्रय की परियोजना पर पर्यटन निर्देशालय से संज्ञान लिया है। पर्यटन निदेशक(ईको) पुष्प कुमार के ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। इसमें भी सरकारी भूमि उपलब्धता के संबंध में आंख्या मांगी है।
डीएम आलोक कुमार ने बताया
डीएम आलोक कुमार ने बताया कि बखिरा झील और तामेश्वरनाथ धाम कॉरीडोर परियोजना के लिए भूमि क्रय के संबंध में प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसमें बखिरा झील के निकट ईको टूरिज्म की दृष्टि से विकास के लिए करीब 15 एकड़ भूमि क्रय के लिए 13.74 करोड़ रुपये की मांग की गई है। इसी तरह तामेश्वरनाथ धाम कॉरीडोर निर्माण के लिए 2.85 एकड़ भूमि क्रय के लिए 05 करोड़ की मांग हुई है। पर्यटन निदेशालय की ओर से दोनों परियोजनाओं के संबंध में सरकारी भूमि की उपलब्धता की जानकारी मांगी गई। इस संबंध में रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है。


