खनन कंपनी को बनानी होगी 50 से 100 वर्षों का रोडमैप: बाबूलाल
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पचुवाड़ा कोल ब्लॉक के विस्थापित ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने आवास, जमीन, रोजगार, शिक्षा, और स्वास्थ्य की संकटों पर चर्चा की। विस्थापितों ने बताया कि उनके पास केवल 12 हजार का वेतन और जर्जर आवास हैं। मरांडी ने विस्थापितों को उनके अधिकारों के लिए लड़ाई का भरोसा दिया।

अमड़ापाड़ा। पचुवाड़ा सेंट्रल कोल ब्लॉक के विस्थापितों का दर्द जानने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री सह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी अमड़ापाड़ा प्रखंड के प्रभावित गांवों- चिलगो, विशुनपुर, कठालडीह, तालझारी और सिंहदेहरी पहुंचे। ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उन्होंने उनकी समस्याएं सुनीं। विस्थापितों ने आवास, जमीन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल संकट की जमीनी हकीकत उनके सामने रखी। भविष्य की जमीन सबसे बड़ी चुनौती...
चिलगो के विस्थापितों की समस्याएं
चिलगो के विस्थापितों ने बताया कि 118 परिवारों को महज सात-सात डिसमिल जमीन पर मकान बनाकर बसा दिया गया है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब उनके बच्चे बड़े होंगे और नए परिवार बसेंगे, तो वे कहां जाएंगे। विस्थापन के कारण उनकी अधिकांश कृषि योग्य भूमि चली गई है।
मरांडी का पुनर्वास के प्रति दृष्टिकोण
इस पर मरांडी ने कहा कि पुनर्वास की योजनाएं केवल वर्तमान को देखकर नहीं बननी चाहिए। सरकार और खनन कंपनी को कम से कम 50 से 100 वर्षों का रोडमैप तैयार कर योजना बनानी होगी, वरना दो पीढ़ियों के बाद विस्थापितों के सामने भारी पलायन का खतरा पैदा हो जाएगा।
रोजगार और वेतन की समस्या
महज 12 हजार का वेतन और जर्जर आवास...
रोजगार का मुद्दा उठाते हुए ग्रामीणों ने बताया कि परिवार के मुखिया से दिनभर मजदूरी कराने के एवज में केवल 12 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। महिलाओं को घर चलाने के नाम पर मिलने वाली 1200 रुपए की सहायता राशि भी सभी को नहीं मिल पा रही है। विशुनपुर निवासी मुन्ना टुडू, दानियल मुर्मू और सिकंदर मुर्मू ने बताया कि कॉलोनी में स्कूल, आधुनिक अस्पताल, खेल का मैदान और पशुओं के पानी पीने तक की व्यवस्था नहीं है। निर्माण के कुछ ही समय बाद मकान जर्जर होने लगे हैं।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान
बाबूलाल मरांडी ने विस्थापितों को भरोसा दिलाया कि सिर्फ मकान दे देना ही पुनर्वास नहीं है। यदि खनन क्षेत्र के लोगों को उनका हक दिलाने के लिए सरकार से भी लड़ना पड़े, तो वे पीछे नहीं हटेंगे। वे जल्द पाकुड़ उपायुक्त से इस संबंध में बात करेंगे।
मौके पर पूर्व विधायक सह भाजपा प्रवक्ता दिनेश विलियम मरांडी, जिलाध्यक्ष सरिता मुर्मू, दुर्गा मरांडी, दर्जनों कार्यकर्ता और विस्थापित ग्रामीण मौजूद थे。


