लोक सेवक जवाबदेही अधिनियम बनाने की मांग, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
आज़ाद अधिकार सेना ने 'लोक सेवक जवाबदेही अधिनियम' बनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए कानून बनाना जरूरी है। ज्ञापन में अवैध निर्माण और भर्ती घोटालों जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया है। सरकार से जल्दी कानून बनाने की मांग की गई है।

आज़ाद अधिकार सेना ने मंगलवार को 'लोक सेवक जवाबदेही अधिनियम (Public Servants Accountability Act)' बनाए जाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। संगठन का कहना है कि सरकारी अधिकारियों और लोक सेवकों की जवाबदेही तय करने के लिए अलग कानून बनाया जाना आवश्यक है। ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान व्यवस्था में अधिकांश मामलों में कार्रवाई केवल नागरिकों, संस्थाओं या निजी व्यक्तियों के खिलाफ होती है, जबकि किसी भी गंभीर अनियमितता के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय नहीं हो पाती। इससे कई मामलों में लापरवाही और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाता।
अन्य गंभीर मामलों का उल्लेख
संगठन ने अपने ज्ञापन में अवैध निर्माण, अतिक्रमण, अवैध खनन, भर्ती घोटाले, प्रश्नपत्र लीक, खाद्य मिलावट, पर्यावरण प्रदूषण, भूमि घोटालों समेत अन्य गंभीर मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि ऐसी अनियमितताएं लंबे समय तक जारी रहती हैं तो संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
कानून बनाने की मांग
आज़ाद अधिकार सेना ने मांग की कि संसद द्वारा लोक सेवक जवाबदेही अधिनियम बनाया जाए, जिसके तहत प्रत्येक गंभीर अनियमितता में संबंधित लोक सेवकों की भूमिका की जांच अनिवार्य हो तथा दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सुशासन की आवश्यकता
संगठन का कहना है कि लोकतंत्र में नागरिकों के साथ-साथ लोक सेवकों की जवाबदेही भी समान रूप से तय होना सुशासन की बुनियादी आवश्यकता है। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से इस संबंध में शीघ्र कानून बनाने की मांग की गई।


