कैंप लगाकर बुजुर्गों का बन रहा आयुष्मान वय वंदना कार्ड, अस्पताल में नहीं होगी परेशानी
70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने पर आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाने में परेशान नहीं होना पड़ेगा। पूर्वी सिंहभूम में स्वास्थ्य विभाग का पहले ही कार्ड बनाने का अभियान चल रहा है ताकि बुजुर्गों को उपचार में कोई देरी न हो।

70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने के बाद आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनवाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। पूर्वी सिंहभूम में स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे पात्र बुजुर्गों का पहले ही कार्ड बनाने का अभियान शुरू किया है। अभियान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में चलाया जा रहा है। इसके तहत चरणबद्ध तरीके से सभी प्रखंडों में क्षेत्रवार कैंप लगाकर कार्ड बनाए जाएंगे। अभी कई बार बुजुर्ग इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन उनका आयुष्मान कार्ड नहीं बना होता है। ऐसे में अस्पताल में ही कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है। नेटवर्क की समस्या या पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी होने पर इसमें समय लग जाता है। इससे मरीज और उनके परिजनों को परेशानी होती है और कई बार इलाज शुरू करने में भी देरी होती है। अभियान के बाद अस्पताल पहुंचने वाले पात्र बुजुर्गों के पास पहले से कार्ड उपलब्ध रहेगा。
स्वास्थ्य विभाग की योजना
स्वास्थ्य विभाग की योजना के अनुसार, शहरी क्षेत्र में पहले अलग-अलग इलाकों को चिह्नित कर कैंप लगाए जाएंगे। इसके बाद प्रखंडवार अभियान चलाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी क्षेत्रवार कैंप लगाकर 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के कार्ड बनाए जाएंगे। विभाग का प्रयास है कि पात्र बुजुर्गों को उनके क्षेत्र में ही यह सुविधा मिल जाए और उन्हें कार्ड बनवाने के लिए अस्पताल या कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़े।
निजी अस्पतालों में भी मिलेगा लाभ
आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनने के बाद पात्र बुजुर्ग योजना से जुड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे। बीमारी और पैकेज के अनुसार योजना के तहत निर्धारित उपचार की सुविधा मिलेगी। कार्ड पहले से बना होने पर अस्पताल पहुंचने के बाद पात्रता और कार्ड बनाने की प्रक्रिया में लगने वाला समय बचेगा। इससे गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचे बुजुर्गों का इलाज जल्द शुरू करने में भी मदद मिलेगी।
इलाज के खर्च का बोझ होगा कम
अभियान का उद्देश्य 70 वर्ष से अधिक उम्र के पात्र बुजुर्गों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। कार्ड बनने के बाद योजना के दायरे में आने वाले उपचार का लाभ निर्धारित नियमों के अनुसार कैशलेस तरीके से मिल सकेगा। इससे महंगे इलाज की स्थिति में बुजुर्गों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। स्वास्थ्य विभाग का जोर अधिक से अधिक पात्र बुजुर्गों को अभियान से जोड़ने पर रहेगा।


