एसटीएच में आयुष्मान योजना के 6 करोड़ रुपये से अधिक के बिल अटके
हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत इलाज के ₹6 करोड़ का भुगतान अटक गया है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए भुगतान रोक दिया है। अस्पताल में 3,000 से अधिक मरीजों के बिल लंबित हैं, जिससे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

हल्द्वानी। डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल (एसटीएच) में आयुष्मान योजना के तहत किए गए मरीजों के इलाज के करीब 6 करोड़ रुपये का भुगतान अटक गया है। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इलाज के पैकेजों में गड़बड़ी सहित कई तकनीकी खामियां बताकर इस भुगतान को रोक दिया है। एसटीएच में आयुष्मान कार्ड धारक भर्ती मरीजों का इलाज निशुल्क किया जाता है। अस्पताल प्रबंधन इलाज पर होने वाले खर्च का बिल आयुष्मान योजना का संचालन करने वाले 'राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण' को भेजता है, जहां से यह राशि अस्पताल के खाते में ट्रांसफर की जाती है। प्राधिकरण ने अलग-अलग बीमारियों (जैसे हड्डी टूटना, पथरी का ऑपरेशन आदि) के लिए विशिष्ट पैकेज और उनकी धनराशि निर्धारित की है। मरीज के डिस्चार्ज होने के बाद अस्पताल प्रबंधन बिल भेजता है, लेकिन साल 2024 से अब तक एसटीएच के 3,000 से अधिक मरीजों के ₹6 करोड़ से ज्यादा के बिल लंबित हैं। अस्पताल की टीम कई बार प्राधिकरण के अधिकारियों से मुलाकात कर चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इस बड़े भुगतान के रुकने से अस्पताल के कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
प्राधिकरण ने गिनाईं ये कमियां
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण बिल पास करने से पहले मरीजों के दस्तावेजों की गहन जांच करता है। जांच में संतोषजनक होने के बाद ही वह बिल पास करता है। प्राधिकरण ने बिल रोकने के पीछे स्वीकृत पैकेज किसी अन्य बीमारी का होना और इलाज किसी दूसरी बीमारी का किया जाना, मरीजों की बायोप्सी रिपोर्ट ना मिलना, ऑपरेशन थिएटर के भीतर की तस्वीरों का न होना, ऑपरेशन के बाद किए जाने वाले एक्स-रे ना भेजना, मरीज की स्थिति ऐसी नहीं थी कि उसे अस्पताल में भर्ती किया जाए, फिर भी उसे भर्ती किया गया जैसी कमियां गिनाई हैं।
आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद परिजनों को थमाया बिल
एक ताजा मामले में, हल्दूचौड़ (दीना) की रहने वाली 30 वर्षीय महिला को 26 जून को एसटीएच में भर्ती किया गया था। डॉक्टरों ने महिला के ऑपरेशन की बात कहकर आयुष्मान योजना के तहत उसका पैकेज ब्लॉक (निर्धारित) कर दिया। बाद में महिला की हालत गंभीर होने पर 30 जुलाई को उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया, लेकिन रेफर करते समय परिजनों को ₹6,000 का बिल थमा दिया गया। एम्स ऋषिकेश में महिला को भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन वहां उनका आयुष्मान कार्ड सक्रिय नहीं हो पाया। इस तकनीकी खराबी के कारण परेशान परिजन अब कार्ड को दोबारा चालू कराने के लिए एसटीएच के चक्कर लगाने पर मजबूर हुए।
आयुष्मान कार्ड से इलाज किए कई मरीजों के बिलों के भुगतान नहीं हुए हैं। इसको लेकर मुख्यालय को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं। प्राधिकरण द्वारा जो कमियां बतायी जा रही हैं उनको दूर भी किया जा रहा है।
डॉ. अरुण जोशी, एमएस, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी


