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24 सितम्बर, 2020|7:23|IST

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आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान बिल राज्यसभा में पारित, जानिए क्या है ये बिल

rajya sabha  file pic

मानसून सत्र के तीसरे दिन राज्यसभा में आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान विधेयक, 2020 को हरी झंडी मिल गई है। बुधवार को उच्च सदन में चर्चा के बाद आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान विधेयक, 2020 को पारित कर दिया गया। इस विधेयक में तीन संस्थानों का विलय करने का प्रस्ताव है।

जामनगर स्थित गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर में इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद, गुलाबकुंवरबा आयुर्वेद महाविद्यालय और इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद फार्मास्यूटिकल साइंसेज के विलय पर मुहर लग गई है। अब जामनगर, गुजरात में स्थित आयुर्वेद विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिया जाएगा। राज्यसभा में आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान विधेयक पर चर्चा के दौरान सांसदों ने गिलोय से लेकर अश्वगंधा के गुणों और कोरोना काल में आयुर्वेद और हौम्योपैथ के फायदे पर चर्चा की। 

आयुर्वेद को एक समान महत्ता मिले: मनोज झा 
आरजेडी के मनोज झा ने कहा कि पूरे देश में आयुर्वेद को एक समान महत्ता मिले इसकी कोशिश की जानी चाहिए। मनोज झा ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि एक महापुरुष ने जून में कहा कि उन्होंने दवाई बना ली है और उन महापुरुष के बयान के बाद मीडिया में डिबेट होने लगे। यह व्यग्रताओं को जन्म देती है। कोरोना संक्रमण की लड़ाई वैज्ञानिक तरीके से हो। उनका कुछ नहीं बिगड़ा लेकिन इसको लेकर एक नियमन होना चाहिए। उनकी दवाइयां बिक गईं और बाद में उन्होंने कहा कि यह तो इम्युनिटी बूस्टर है। तो कोरोना की राजनीतिक अर्थशास्त्र में किस तरह आयुर्वेद के नाम का दुरुपयोग हुआ है, उसका भी हमें ध्यान में रखना चाहिए। 

 

आठवले का आयुर्वेद को शायराना समर्थन 
केंद्रीय मंत्री और आरपीआई सांसद रामदास आठवले ने आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान विधेयक का शायराना अंदाज में समर्थन किया।

जड़ी-बूटी से ठीक होते थे मरीज 
बीएसपी सांसद सांसद वीर सिंह ने कहा कि मेरे स्वर्गीय नानाजी आयुर्वेद के वैद्य थे। सुबह ही उनके पास सैकड़ों मरीज आते थे। वह सभी को जड़ी-बूटियों से ही सही कर देते थे। उन्होंने आयुर्वेद के विकास का समर्थन करते हुए कहा कि यह काफी फायदेमंद होगा। 

 जेडीयू ने धनवंतरि से लेकर चरक तक का लिया नाम 
जेडीयू के रामचंद्र प्रसाद सिंह आयुर्वेद बिल का समर्थन करते हुए कहा कि गुजरात में तीन संस्थानों को साथ लाकर एक नैशनल इंस्टीट्यूट बनाया गया है। उन्होंने कहा कि देश में आयुर्वेद का बहुत शानदार इतिहास है। धनवंतरी तो आयुर्वेद के पितामह है। सुश्रुत, और चरक जैसे विभूतियों ने इसपर काफी काम किया। कोरोना काल में दुनिया में सबलोग गिलोय, तुलसी और ऐलोवेरा की चर्चा कर रहे हैं।

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  • Web Title:Ayurveda teaching and research institute bill passed in Rajya Sabha know what bill