ayodhya verdict know why sunni waqf board lost case - Ayodhya Verdict: जानिए किस वजह से केस हारा सुन्नी बोर्ड, निर्मोही अखाड़े की रही अहम भूमिका DA Image
5 दिसंबर, 2019|10:57|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

Ayodhya Verdict: जानिए किस वजह से केस हारा सुन्नी बोर्ड, निर्मोही अखाड़े की रही अहम भूमिका

ayodhya verdict

Ayodhya Verdict: सुन्नी बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा अयोध्या मामले में केस हार गए हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान बोर्ड अखाड़े के समर्थन में आ गया था। बोर्ड ने आग्रह किया था कि चबूतरे पर पुजारी को अधिकार दिया जाए। सुन्नी बोर्ड को अयोध्या में ही पांच एकड़ का प्लाट मस्जिद के लिए दिया है।

वहीं निर्मोही अखाड़े के पुजारी को अधिकार से वंचित कर मंदिर के लिए बनने वाले ट्रस्ट में जगह देने का आदेश दिया गया है। लेकिन इस केस में रुचिकर बात यह है कि निर्मोही अखाड़ा जो विवादित स्थल पर 1885 से सेबत अधिकार (पुजारी) के लिए लड़ रहा है और उसका मुख्य प्रतिद्वंद्वी मुस्लिम पक्ष ही रहा है। लेकिन सुनवाई के दौरान अखाड़े का जो पक्ष उच्चतम न्यायालय में रहा वह विरोधाभासों से भरा रहा। वह मुस्लिम पक्ष का विरोध करने के बजाए रामलला विराजमान, गोपाल सिंह विशारद और हिंदू पक्षों का ही विरोध करने लगा। उसने कहा कि उसे सिर्फ पुजारी का अधिकार चाहिए। 

पूछा, देव नहीं तो पूजा किसकी करेंगे

अदालत ने अखाड़े से पूछा भी कि आप पूजा किसकी करेंगे जब देव ही नहीं होंगे। इस स्थिति में यदि देव हार जाएं और मस्जिद बनाने का आदेश हो तो क्या मस्जिद के पुजारी बनेंगे। अखाड़ा ने कोर्ट के इस संकेत को भी नहीं समझा और पुराने रुख पर ही अड़ा रहा कि मंदिर में पुजारी का अधिकार उन्हें ही चाहिए। क्योंकि वह 1860 से उनके कब्जे में है, 23 दिसंबर 1949 में विवादित स्थल पर मूर्ति भी उन्होंने ही रखी थी।   

Ayodhya Verdict : हालात सामान्य, पर सोशल मीडिया की निगरानी जारी

बोर्ड ने की अखाड़े की वकालत 

अंत में स्थित ने नया मोड़ लिया और सुन्नी बोर्ड ने देखा कि अखाड़ा निशाने पर है तो उसने अखाड़े का समर्थन किया और कहा कि बोर्ड ने अखाड़े को लगातार बाहरी चबूतरे पर पूजा का अधिकार दिया है और वह उसे ही रामजन्म का स्थान मानते हैं। वे कभी ढांचे के अंदर नहीं गए और उन्होंने मस्जिद के वजूद को स्वीकारा है। 

ये भी पढ़ें: अयोध्या से जुड़े धर्माचार्यों व पक्षकारों समेत 59 लोगों की सुरक्षा बढ़ी

1857 में लगी रेलिंग 

बोर्ड के अखाड़े की तरफदारी करने पर पांच सदस्यीय पीठ ने स्थिति को भांप लिया और पूछा कि राम चबूतरा कब बना, मस्जिद के आगे लोहे की रेलिंग कब लगी। क्या श्रद्धालु केंद्रीय गुंबद की ओर मुंह करके पूजा नहीं करते थे। मस्जिद के आगे लोहे की रेलिंग 1857 के बवाल के बाद लगा दी गई थी और हिंदुओ ने बाहरी क्षेत्र में चबूतरा बनाकर उस पर पूजा शुरू कर दी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:ayodhya verdict know why sunni waqf board lost case