Ayodhya verdict Congress Reaction on Supreme Court verdict on Ram Janmabhoomi Babri Masjid title suit Ayodhya Judgement Ram Mandir - Ayodhya Verdict: अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोली कांग्रेस: हम राम मंदिर निर्माण के पक्ष में हैं-VIDEO DA Image
12 नबम्बर, 2019|11:40|IST

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Ayodhya Verdict: अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोली कांग्रेस: हम राम मंदिर निर्माण के पक्ष में हैं-VIDEO

congress leader randeep singh surjewala addresses a press conference at aicc office

Ram Janmbhoomi Babri Masjid Dispute Ayodhya Verdict: अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले (Ram Janmabhoomi Babri Masjid title suit) में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने अपना फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अयोध्या की विवादित जमीन का मालिकाना हक रामलला को मिलेगा, वहीं मस्जिद के लिए उपयुक्त स्थान पर 5 एकड़ जमीन मुस्लिमों को दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सर्वसम्मति के फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया और केन्द्र को निर्देश दिया कि मस्जिद निर्माण के लिये सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ का भूखंड आबंटित किया जाए। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस व्यवस्था के साथ ही राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील 134 साल से भी अधिक पुराने इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया।

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस का बयान आया। कांग्रेस ने कहा कि वह राम मंदिर निर्माण के पक्ष में है। कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है और हम राम मंदिर निर्माण के पक्ष में हैं। इस फैसले से सिर्फ राम मंदिर निर्माण का रास्ता ही नहीं खुलता है, बल्कि बीजेपी और अन्य की राजनीति का यह मुद्दा भी खत्म हो गया।

अयोध्या की जमीन पर मंदिर निर्माण की बात पर रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ चुका है। स्वाभाविक तौर पर आपके सवाल का जवाब हां में है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण के पक्षधर हैं। 

संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। संविधान पीठ ने अपने 1045 पन्नों के फैसले में कहा कि मस्जिद का निर्माण 'प्रमुख स्थल पर किया जाना चाहिए और उस स्थान पर मंदिर निर्माण के लिये तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए जिसके प्रति हिन्दुओं की यह आस्था है कि भगवान राम का जन्म यहीं हुआ था। इस स्थान पर 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद थी जिसे कार सेवकों ने छह दिसंबर, 1992 को गिरा दिया था।

पीठ ने कहा कि 2.77 एकड़ की विवादित भूमि का अधिकार राम लला विराजमान को सौंप दिया जाये, जो इस मामले में एक वादकारी हैं। हालांकि यह भूमि केन्द्र सरकार के रिसीवर के कब्जे में ही रहेगी। न्यायालय ने कहा कि हिन्दू यह साबित करने में सफल रहे हैं कि विवादित ढांचे के बाहरी बरामदे पर उनका कब्जा था और उप्र सुन्नी वक्फ बोर्ड अध्योध्या विवाद में अपना मामला साबित करने में विफल रहा है।

संविधान पीठ ने यह माना कि विवादित स्थल के बाहरी बरामदे में हिन्दुओं द्वारा व्यापक रूप से पूजा अर्चना की जाती रही है और साक्ष्यों से पता चलता है कि मस्जिद में शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते थे जो इस बात का सूचक है कि उन्होंने इस स्थान पर कब्जा छोड़ा नहीं था। शीर्ष अदालत ने कहा कि मस्जिद में नमाज पढ़ने में बाधा डाले जाने के बावजूद साक्ष्य इस बात के सूचक है कि वहां नमाज पढ़ना बंद नहीं हुआ था।

संविधान पीठ ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल के नीचे मिली संरचना इस्लामिक नहीं थी लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यह साबित नहीं किया कि क्या मस्जिद निर्माण के लिये मंदिर गिराया गया था। न्यायालय ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण के साक्ष्यों को महज राय बताना इस संस्था के साथ अन्याय होगा। न्यायालय ने कहा कि हिन्दू विवादित स्थल को ही भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं और मुस्लिम भी इस स्थान के बारे में यही कहते हैं।

पीठ ने विवादित ढांचे में ही भगवान राम का जन्म होने के बारे में हिन्दुओं की आस्था अविवादित है। यही नहीं, सीता रसोई, राम चबूतरा और भण्डार गृह की उपस्थिति इस स्थान के धार्मिक तथ्य की गवाह हैं। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि सिर्फ आस्था और विश्वास के आधार पर मालिकाना हक स्थापित नहीं किया जा सकता और ये विवाद का निबटारा करने में सूचक हो सकते हैं।

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