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अयोध्या का अनोखा 'सीताराम बैंक', विदेश से भी आकर लोग खुलवा रहे खाता: क्या है खास

अयोध्या में एक अनोखा बैंक है जिसमें सीताराम का नाम ही जमा किया जाता है। महंत नृत्य गोपाल दास जीने यह बैंक 1970 में खोला था। हालांकि प्राण प्रतिष्ठा के बाद ब़ड़ी संख्या में लोग इससे जुड़े हैं।

अयोध्या का अनोखा 'सीताराम बैंक', विदेश से भी आकर लोग खुलवा रहे खाता: क्या है खास
Ankit Ojhaपीटीआई,अयोध्याSun, 11 Feb 2024 04:38 PM
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अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही श्रद्धालुओं के तांता लगा है। श्रीराम की राजधानी में एक ऐसा अनोखा बैंक है जहां पैसे को कोई लेनदेन नहीं होता फिर भी दुनियाभर के 35 हजार लोगों ने अपना खाता खुलवा रखा है। दरअसल यह बैंक आस्था और मानसिक शांति के उद्देश्य से खोला गया है। यह बैंक महंत नृत्यगोपाल दास जी ने 1970 में खोला था और आज इसमें यूके, कनाडा, नेपाल, फिजी और यूएई के लोगों ने भी खाता खुलवा रखा है। इसका नाम 'इंटरनेशल श्री सीताराम नाम बैंक' है। 

बता दें कि महंत नृत्यगोपाल दास श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। आइए आपको यह भी बता देतें है कि आखिर यह बैंक काम कैसे करता है। दरअसल यहां से लोगों को एक बुकलेट लाल रंग के पेन इशू किया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु इस बुकलेट पर 5 लाख बार 'सीताराम' लिखकर अपने अकाउंट में जमा करवा देते हैं। बैंक बाकायदा पासबुक भी देता है जिसमें उसके द्वारा जमा करवाई गई बुकलेट का ब्योरा दर्ज होता है। 

रिपोर्ट के मुताबिक प्राण प्रतिष्ठा के बाद में इस बैंक में खाताधारक तेजी से बढ़े हैं। अब पूरे भारत और विदेश में मिलाकर इस बैंक की 136 शाखाएं हो चुकी हैं। बहुत सारे लोग पोस्ट से भी बुकलेट मंगवाते और जमा करवाते हैं। बैंक के मैनेजर महंत पुनीत राम दास महाराज ने बताया कि जिस तरह से लोग मंदिर में मानसिक शांति के लिए जाते हैं वैसे ही सीताराम लिखकर भी लोग प्रार्थना के रूप में अपने खाते में शांति और आस्था जमा करवा सकते हैं। जैसे हम कहते हैं कि भगवान ने सबका खाता खोल रखा है और उसमें उसके अच्छे बुरे कर्म को दर्ज करते हैं। यह खाता भी कुछ उसी तरह का है। 

पुनीत राम दास ने कहा कि अगर कोई 84 लाख बार सीताराम लिखता है तो उसे मोक्ष मिल जाता है। उन्होंने बिहार के गया के रहने वाले जीतू नागर के बारे में बताया कि वह पिछले 14 सालों से इस बैंक आते हैं और हमेशा श्रीराम नाम की बुकलेट जमा करवाते हैं। उन्होंने बताया कि जीतू नागर 1.37 लाख बार सीताराम लिख चुके हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के बरेली के रहने वाले सुमन दास ने 25 लाख सीताराम नाम जमा करवाए हैं। 


 

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