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NCERT किताब में बदलाव पर क्या बोले राम मंदिर के मुख्य पुजारी? बाबरी शब्द हटाने से खुश हैं या फिर...

मुख्य पुजारी ने NCERT को लेकर कहा, 'यह नहीं बताया गया कि 6 दिसंबर, 1992 को तीन गुंबद वाली संरचना को कैसे हटाया गया था। वे तो केवल 9 नवंबर, 2019 से इस मुद्दे को बताना शुरू करते हैं।'

NCERT किताब में बदलाव पर क्या बोले राम मंदिर के मुख्य पुजारी? बाबरी शब्द हटाने से खुश हैं या फिर...
Niteesh Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 16 Jun 2024 10:48 PM
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अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास महाराज ने NCERT की किताबों में हुए बदलाव पर नाराजगी जताई है। उन्होंने रविवार को कहा कि वह एनसीईआरटी की 12वीं की राजनीति विज्ञान की नई टेक्स्ट बुक में अयोध्या आंदोलन से जुड़ी घटनाओं को हटाने से असंतुष्ट हैं। सत्येंद्र महाराज ने कहा कि बाबरी मस्जिद मुद्दे को लेकर नई पाठ्यपुस्तक में कुछ कमियां हैं। मुख्य पुजारी ने NCERT को लेकर कहा, 'यह नहीं बताया गया कि 6 दिसंबर, 1992 को तीन गुंबद वाली संरचना को कैसे हटाया गया था। वे तो केवल 9 नवंबर, 2019 से इस मुद्दे को बताना शुरू करते हैं, जब अयोध्या पर फैसला आया था।'

सत्येंद्र दास महाराज की यह टिप्पणी एनसीईआरटी की टेक्स्ट बुक में हुए बदलाव को लेकर जारी बहस के बीच आई है। दरअसल, 12वीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में बाबरी मस्जिद को तीन गुंबद वाली संरचना कहा गया है। इसे लेकर स्कूली पाठ्यक्रम के भगवाकरण का आरोप लगा रहा है। एनसीईआरटी के निदेशक ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि स्कूली पाठ्यपुस्तकों में गुजरात दंगों और बाबरी मस्जिद गिराए जाने के संदर्भों को इसलिए संशोधित किया गया, क्योंकि दंगों के बारे में पढ़ाना हिंसक और अवसादग्रस्त नागरिक पैदा कर सकता है।

NCERT के निदेशक ने फैसले को लेकर क्या कहा 
एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों में बदलाव वार्षिक संशोधन का हिस्सा है। इसे शोर-शराबे का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। NCERT की पाठ्यपुस्तकों में गुजरात दंगों या बाबरी मस्जिद गिराए जाने के संदर्भ में बदलाव के बारे में पूछे जाने पर सकलानी ने कहा, 'हमें स्कूली पाठ्यपुस्तकों में दंगों के बारे में क्यों पढ़ाना चाहिए? हम सकारात्मक नागरिक बनाना चाहते हैं, न कि हिंसक और अवसादग्रस्त व्यक्ति। क्या हमें अपने छात्रों को इस तरह से पढ़ाना चाहिए कि वे आक्रामक हो जाएं, समाज में नफरत पैदा करें या नफरत का शिकार बनें? क्या यह शिक्षा का उद्देश्य है? क्या हमें ऐसे छोटे बच्चों को दंगों के बारे में पढ़ाना चाहिए... जब वे बड़े होंगे, तो वे इसके बारे में सीख सकते हैं।'
(एजेंसी इनपुट के साथ)