Ayodhya mamle mai supreme court mai hearing jari jane court mai har halchal ki live updates - अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, खाली जमीन पर बाबरी मस्जिद का नहीं हुआ था निर्माण DA Image
17 नबम्बर, 2019|5:48|IST

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अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, खाली जमीन पर बाबरी मस्जिद का नहीं हुआ था निर्माण

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भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने शनिवार को कहा कि इस बात के स्पष्ट सबूत हैं कि हिंदू मानते हैं कि भगवान राम विवादित स्थान पर पैदा हुए थे। उन्होंने यह बात खचाखच भरे अदालत कक्ष में अयोध्या भूमि विवाद का एकमत फैसला पढ़ते हुए कही। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सवेर्क्षण विभाग की रिपोर्ट में कही बात को मानते हुए कहा, “बाबरी मस्जिद का निमार्ण खाली जमीन पर नहीं हुआ था। विवादित जमीन के नीचे एक ढांचा था और यह इस्लामिक ढांचा नहीं था। अदालत ने कहा कि निमोर्ही अखाड़े का दावा केवल प्रबंधन का है। सरकार ने अखाड़े की याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक योजना के तहत स्थापित न्यायालय को चाहिए कि वह उपासकों की आस्था और विश्वास में हस्तक्षेप करने से बचे। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता संविधान की मूल विशेषता है और अदालत को संतुलन बनाए रखना चाहिए। अदालत ने माना कि मीर बाकी द्वारा निर्मित मस्जिद बाबर के आदेश से बनी थी और मस्जिद के अंदर 1949 में मूर्तियों को रखा गया था। इससे पहले प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा था कि फैसला सर्वसम्मति से लिया जाएगा।
 

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई के लाइव अपडेट

- हिंदू इस स्थान को भगवान राम की जन्मभूमि मानते हैं, यहां तक कि मुसलमान भी विवादित स्थल के बारे में यही कहते हैं: न्यायालय। 

- न्यायालय ने विवादित स्थल पर पुरातात्विक साक्ष्यों को महत्व दिया। हिंदुओं की यह अविवादित मान्यता है कि भगवान राम का जन्म गिराई गयी संरचना मं ही हुआ था : न्यायालय। 

- बुनियादी संरचना इस्लामिक ढांचा नहीं थी : न्यायालय। 

- एएसआई ने इस तथ्य को स्थापित किया कि गिराए गए ढांचे के नीचे मंदिर था : न्यायालय।

- एएसआई यह नहीं बता पाया कि क्या मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी: न्यायालय। 

- बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी : न्यायालय। 

- न्यायालय ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों को महज राय बताना एएसआई के प्रति बहुत अन्याय होगा।

- सबूत है कि बाहरी स्थान पर हिन्दुओं का कब्जा था, इस पर मुस्लिम का कब्जा नहीं था। लेकिन मुस्लिम अंदरूनी भाग में नमाज़ भी करते रहे।

- बाबर ने मस्जिद ने बनाई थी लेकिन वे कोई सबूत नहीं दे सके की इस पर उनका कब्जा था और नमाज़ की जाती थी जबकि यात्रियों के विवरण से पर चलता है कि हिन्दू यहां पूजा करते थे।

- 1857 में रेलिंग लगने के बाद सुन्नी बोर्ड यह नहीं बता सका की ये मस्जिद समर्पित थी
- 16 दिसंबर 1949 को आखिरी नमाज की गई थी।  हाईकोर्ट का यह कहना कि दोनों पक्षों का कब्जा था गलत है उसके सामने बंटवारे का मुकद्दमा नहीं था। मुस्लिम ये नहीं बता सके की अंदरुनी भाग में उनका एक्सक्लूसिव कब्जा था। 

- मुस्लिम को मस्जिद के लिए वैकल्पिक स्थान पर प्लॉट दिया जाए

- शिया वक्फ बोर्ड का दावा विवादित ढांचे को लेकर था जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया।
- न्यायालय ने कहा कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार विवादित भूमि सरकारी है ।
- न्यायालय अब पूजा के अधिकार के लिये गोपाल सिंह विशारद के दावे पर फैसला सुना रहा है।
- न्यायालय ने कहा कि निर्मोही अखाड़े की याचिका कानूनी समय सीमा के दायरे में नहीं, न ही वह रखरखाव या राम लला के उपासक। 
- न्यायालय ने कहा, राम जन्मभूमि एक न्याय सम्मत व्यक्ति नहीं। 

- रामजन्म स्थान पर एएसआई की रिपोर्ट मान्य है।
- स्थल पर ईदगाह का मामला उठाना ऑफ्टर थॉट है जो मुस्लिम पक्ष द्वारा एएसआई की रिपोर्ट के बाद उठाया गया।
- एएसआई के निष्कर्ष की यहां मंदिर था इसके होने के बारे में सबूत
- 12 और 16 वीं सदी के बीच यहां मस्जिद थी इसके सबूत नहीं है
- राम का केंद्रीय गुंबद के बीच में हुआ यह मान्यता है, कोर्ट ने पाया है कि ये वास्तविकता है। क्योंकि सभी गवाहों का यहीं मामन्ना है ये आस्था है जिस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
- यात्रियों के विवरण को सावधानी से देखने की जरूरत है, वहीं गजट ने  इसके सबूतों  की पुष्टि की है। हालांकि मालिकाना हक आस्था के आधार पर नहीं तय किया जा सकता सबूत है कि बाहरी स्थान पर हिन्दुओं का कब्जा था, इस पर मुस्लिम का कब्जा नहीं था। लेकिन मुस्लिम अंदरूनी भाग में नमाज़ भी करते रहे।

 

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