Ayodhya dispute no party has claimed ownership in 161 years - अयोध्या विवाद: किसी पक्ष ने 161 साल में मलिकाना हक नहीं जताया DA Image
12 दिसंबर, 2019|11:34|IST

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अयोध्या विवाद: किसी पक्ष ने 161 साल में मलिकाना हक नहीं जताया   

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अयोध्या विवाद पर उच्चतम न्यायालय में नियमित सुनवाई जारी है। हिंदू पक्ष से निर्मोही अखाड़ा और मुस्लिम पक्ष से सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित स्थल पर स्वामित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। हालांकि, इस जमीन की असली मिल्कियत तो नजूल सरकार के पास है। राजस्व अभिलेखों में भी जमीन उसी के नाम दर्ज है। नजूल भूमि अवध सूबे की वह भूमि है, जिसे ब्रिटिश हुकूमत में तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग ने जब्त कर सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया था। दरअसल, 1857 के विद्रोह का अधिकतम प्रभाव अवध क्षेत्र में था। इस कारण ब्रिटिश हुकूमत अवध के तत्कालीन नवाब वाजिद अली शाह से नाराज थी। उसने नवाब को सबक सिखाने के लिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 15 मार्च 1858 को उनकी पूरी संपत्ति जब्त करने की घोषणा की। 

पैतृक संपत्ति को लेकर ब्रिटिश हुकूमत के समक्ष खुद के स्वामित्व का दावा करने वाले करीब एक दर्जन ताल्लुकदारों की जमीन विधिक प्रक्रिया में वापस भी की गई। फिर भी विवादित स्थल पर स्वामित्व को लेकर न तो निर्मोही अखाड़ा ने ब्रिटिश सरकार के समक्ष दावा प्रस्तुत किया, न ही मुस्लिम पक्षकारों ने मलिकाना हक जताया। यह स्थिति 2019 तक कायम है। 22/23 दिसंबर 1949 को विवादित स्थल पर रामलला के प्राकट्य के बाद 1959 में सिविल अदासत में पहला दावा निर्मोही अखाड़ा द्वारा किया गया। 

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  • Web Title:Ayodhya dispute no party has claimed ownership in 161 years