भारत मे हर घंटे जान दे रहे 20 लोग : डॉ. पंकज
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज में 'मौन चीखें और चेतावनी संकेतों की पहचान' विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. पंकज कुमार सिंह ने आत्महत्या के गंभीर मुद्दे पर छात्रों से बात की और सहयोग व समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।

वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर गुरुवार को डीएवी पीजी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग द्वारा ‘मौन चीखें और क्लास रूम से घर तक हुए चेतावनी संकेतों की पहचान’ विषयक कार्यशाला हुई। मुख्य वक्ता एलजीबी क्षेत्रीय संस्थान तेजपुर (असम) के मनोचिकित्सक डॉ. पंकज कुमार सिंह ने आत्महत्या के संवेदनशील मुद्दे पर छात्रों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में प्रति घंटे आत्महत्या के 20 मामले सामने आ रहे है जो काफी चिंताजनक हैं। सबसे अधिक रिपोर्ट दक्षिण भारत से आ रही है लेकिन इसका आशय यह नहीं कि सिर्फ वहीं ज्यादा आत्महत्या हो रही है, उत्तर भारत में मामले कम प्रकाश में आ रहे है।
रोकथाम के संदर्भ में डॉ. पंकज ने कहा कि आत्महत्या के विचार जब भी मन में आते हैं तो उसे अपने साथियों परिजनों से साझा जरूर करें। परिवार और मित्रों के सतत सहयोग से ही इसपर कुछ अंकुश लगाया जा सकता है। जरूरत पर बिना हिचकिचाहट मनोचिकित्सक से समुचित समाधान भी ले। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल ने अध्यक्षता की। इस मौके पर महाविद्यालय के प्रबंधक अजीत कुमार सिंह यादव ने स्मृति चिह्न भेंटकर अतिथि का स्वागत किया। विषय स्थापना विभागाध्यक्ष प्रो. ऋचारानी यादव, संचालन डॉ. ऐश्वर्या उपाध्याय एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अखिलेन्द्र सिंह ने दिया। कार्यक्रम में प्रो. मीनू लाकड़ा, डॉ. कल्पना सिंह, डॉ. राजेश झा की खास मौजूदगी रही।


