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देश प्रदूषण के खतरे से वाकिफ है लेकिन 83 फीसदी लोग नहीं जानते एक्यूआई

विशेष संवाददाता,नई दिल्लीPublished By: Arun Binjola
Fri, 05 Jun 2020 10:29 AM
 प्रदूषण के खतरे से वाकिफ है लेकिन 83 फीसदी लोग नहीं जानते एक्यूआई

दिल्ली-एनसीआर में लोगों में प्रदूषण के खतरों का अहसास तो है लेकिन इसके विभिन्न स्वरूप एवं इससे जुड़ी अन्य जानकारियों की लोगों में कमी है। पयार्वरण दिवस की पूर्व संध्या पर अमेरिकी और लंग केयर फाउंडेशन द्वारा जारी सर्वेक्षण से तो यही प्रतीत होता है। सर्वे के अनुसार 83.6 फीसदी लोगों को एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) और 92.2 फीसदी को पीएम 10 और पीएम 2.5 के बीच अंतर का पता नहीं था।

अमेरिकी दूतावास में साफ हवा और नागरिक कार्यक्रम (शान) लांच किया गया। इस मौके पर वायु प्रदूषण जागरुकता पर यह सर्वेक्षण भी जारी किया गया। सर्वे में 57.7 फीसदी उत्तरदाताओं ने दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता का मूल्यांकन गन्दी या बहुत गन्दी हवा के रूप में किया।

तीन-चौथाई से अधिक उत्तरदाताओं 78.1 फीसदी को वायु प्रदूषण को कम करने के लिए स्थानीय सरकार द्वारा किसी भी पहल की जानकारी नहीं थी। अधिकांश उत्तरदाताओं 78.9 को को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

सर्वे में 1757 लोग शामिल थे। इनमें से 82.2 को पता था कि वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। जबकि 76.5 फीसदी ने माना कि यह फेफड़ों को प्रभावित करता है। केवल 14.7 फीसदी ने कहा कि यह हृदय को प्रभावित करता है। 9.2 फीसदी ने कहा कि मस्तिष्क और केवल 1.7 फीसदी ने कहा कि वायु प्रदूषण प्रजनन प्रणाली को प्रभावित करता है।

एक तिहाई से अधिक 38.8 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने या उनके परिवार के सदस्यों ने पिछले एक साल में सांस की परेशानी के कारण अस्पताल का दौरा किया है।

सर्वेक्षण में स्वच्छ हवा को प्राप्त करने की आशा और प्रतिबद्धता पर भी प्रकाश डाला गया। 78.7 फीसदी ने उत्तरदाताओं ने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन करने पर सहमति व्यक्त की, भले ही कदमों से उन्हें असुविधा हो। 77% उत्तरदाताओं ने कहा कि वे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग अधिक करने के लिए एक व्यावहारिक परिवर्तन करेंगे। यह दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के बेहतर स्वास्थ्य और भलाई के लिए स्वच्छ हवा प्राप्त करने में सरकार द्वारा बढ़ाई गयी कदम के लिए जनता की अधिक भागीदारी और स्वीकृति की उम्मीद कराता है।

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