बना कर अपनी फौज क्रांतिवीरों ने तज दीं थीं सुविधाएं और तहसीलदारी तक
पीलीभीत में अगस्त क्रांति का इतिहास हर साल अगस्त में ताजा हो जाता है। यहां के एक जमींदार परिवार ने क्रांति के लिए अपने सुख-सुविधाएं और सरकारी नौकरी छोड़ी। क्रांतिकारी कुंवर भगवान सिंह और उनके साथी महाशय कुंदन लाल ने भारत को आजाद कराने के लिए संघर्ष किया।

पीलीभीत। आजादी के लिए किए गए प्रयासों से जुड़ा अतीत बरबस ही अगस्त माह में हर किसी के जहन में ताजा हो जाता है। अगस्त क्रांति की बात करें तो नौ अगस्त के दिन से ही एक प्रचंड शुरूआत हो गई थी। रुहेलखंड के सबसे छोटे जिले पीलीभीत का भी अगस्त क्रांति से जुड़ाव रहा है। यहां एक जमींदार परिवार ने अपने घर की सुख सुविधाएं ही नहीं बल्कि पढ़ाई लिखाई के बाद उन दिनों की तहसीलदार की नौकरी तक छोड़ दी थी। स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष की गाथा से मिली जानकारीक के मुताबिक जिले में सर्वाधिक आजादी के परवानों ने जो संघर्ष किया वह अदभुत था। जनपद में क्रांतिकारी आंदोलन की शुरूआत करने वाले कुंवर भगवान सिंह अपने जमींदार पिता की सुख सुविधाओं के होने के बाद भी मां भारती की सेवा की राह चुनी। बीए करने के बाद उन्हें तब के दौर में तहसीलदारी मिल गई थी। पर उन्होंने नौकरी छोड़ दी। अपने नौजवान साथियों के साथ उल्लिका पहुंचे थे। अपने साथी महाशय कुंदन लाल के घर पहुचे और बोले इस बार हम लोगों को गिफ्तार नहीं होना है। भारत मां का आजादी दिलानी है। डायरी के मुताबिक कुंदन लाल की मां ने दस अगस्त को कपड़े, 25 रुपये एक रिवाल्वर थैले में डाल कर गुपचुप भगा दिया था। जब जानकारी लगी तो बरतानिया सरकार के मुलाजिम कुंदन लाल के घर पहुंचे तो उनकी मां ने बताया कि दो घंटे पहले अपने बेटे को निकाल दिया है। इस पर दारोगा ने उनकी मां के बेत जड़ दिया था।
जारी कर दिया था रोस्टर
अगस्त क्रांति की यही वह ज्वाला थी कि कुंवर भगवान सिंह के रणबांकुरे दियोरिया जंगल में रुके और बीसलपुर के रामलीला मैदान तक आ जाने की फिराक में थे। ज्योरह के क्रांतिकारी पंडित छोटे लाल देहाती ने एक चिट्ठी जारी करते हुए कहा कि 12 को बीसलपुर में कोतवाली लूटेंगे, 13 को बरखेड़ा और 14 बीसलपुर व 15 को बिलसंडा थाना लूटा जाएगा। पर
उल्लिका, बमरौली और ज्योरह का अभूतपूर्व योगदान
वरिष्ठ साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी ने बताया कि बीसलपुर क्षेत्र के उल्लिका, बमरौली और ज्योरह क्षेत्र का अभूतपूर्व योगदान अगस्त क्रांति को लेकर रहा है। कुंवर भगवान सिंह और कुंदन लाल और छोटे पंडित के ऐसे प्रेरक प्रसंग है कि रोंगटे खड़े हो जाते हैं।


