जैश-ए-मुहम्मद के संदिग्ध आतंकी जफर को पाकिस्तान में लेना था प्रशिक्षण
- एटीएस को आरोपी के मोबाइल की जांच में मिले सुराग - चंदा जुटाकर

लखनऊ, विशेष संवाददाता
आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) को पाकिस्तान के लिए फंडिंग करने के आरोप में पकड़े गए जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी मु. जफर के मोबाइल फोन की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि जफर को प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान जाना था। इसके लिए पूरी योजना बन चुकी थी। साथ ही जफर के जिहाद के नाम पर चंदा जुटाकर वह रकम कई किस्तों में पाकिस्तानी नंबरों पर ट्रांसफर किए जाने के भी साक्ष्य मिले हैं।
गिरफ्तारी की जानकारी
एटीएस ने आरोपी जफर को 16 अगस्त को मेरठ से गिरफ्तार किया था। मूलरूप से बिहार के निवासी जफर को जल्द पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर नए सिरे से पूछताछ किए जाने की तैयारी है। शुरुआती पूछताछ में आरोपी जफर का पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई मदरसों में उसका नेटवर्क सामने आया था। वह हापुड़ के एक मदरसे में मौलवी भी था। आरोपी ने क्रिप्टो करेंसी में रकम पाकिस्तान के नंबर पर ट्रांसफर करने की बात भी स्वीकार की थी।
सोशल मीडिया विश्लेषण
जफर के सोशल मीडिया के विश्लेषण में यह भी सामने आया था कि वह जैश-ए-मुहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर की भड़काऊ और जेहादी तकरीरों से प्रभावित था। वह कट्टरपंथी युवकों को हिंसात्मक जेहाद के लिए उकसाता भी था। जैश-ए-मुहम्मद के जिहादी ग्रुप में जुड़ने के बाद जफर पाकिस्तानी हैंडलर के सीधे संपर्क में आया था और उनके लिए फंडिंग जुटाने का काम कर रहा था।


