शब्दों को केवल पढ़ा नहीं जाए, उन्हें आत्मसात किया जाए: सतीश महाना
- संदर्भ पुस्तकालय में स्थापित हुआ 467वां युगऋषि वाङ्मय लखनऊ, विशेष संवाददाता विधानसभा

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा है कि शब्दों को केवल पढ़ने का नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का भी प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने शुक्रवार को संदर्भ पुस्तकालय में गायत्री ज्ञान मंदिर इंदिरा नगर परिवार के संस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सम्पूर्ण 79 खंडों के 467वें युगऋषि वाङ्मय की स्थापना के मौके पर यह बात कही।
सद्साहित्य का महत्व
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ऋषि का सद्साहित्य समाज के मार्गदर्शन के लिए है। ऐसे साहित्य से व्यक्ति को जीवन में सकारात्मक दिशा, संस्कार और सत्कर्म की प्रेरणा मिलती है। ज्ञान और सद्विचारों पर आधारित साहित्य व्यक्ति के चरित्र निर्माण के साथ-साथ समाज को भी नई दिशा प्रदान करता है। युगऋषि वाङ्मय में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों का समावेश है, जो समाज के लिए प्रेरणादायी है।
युगऋषि वाङ्मय की स्थापना
युगऋषि वाङ्मय की स्थापना शशि गंगवार व देवेंद्र सिंह गंगवार द्वारा समर्पित की गई। इस अवसर पर सन्दर्भ पुस्तकालय में युगऋषि वाङ्मय साहित्य के साथ ही विधानसभा अध्यक्ष को अखंड ज्योति पत्रिका भेंट की गई। वाङ्मय स्थापना अभियान के मुख्य संयोजक उमाशंकर शर्मा ने कहा कि ऋषि का सद्ज्ञान मनुष्य को सत्कर्म करने की शक्ति प्रदान करता है। युगऋषि वाङ्मय समाज को नैतिक मूल्यों, ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक चिंतन की दिशा प्रदान करने वाला अमूल्य साहित्य है।


