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28 जनवरी, 2020|10:05|IST

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विकास के पहिए को रफ्तार दे रही है हिंदी - अशोक चक्रधर

ashok chakradhar

हिंदी दिवस के मौके पर पूरे देश ने जश्न मनाया। इस खास मौके पर हिन्दुस्तान अखबार ने शनिवार को दिल्ली के वसंत कुंज में कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें मशहूर शायर वसीम बरेलवी, अशोक चक्रधर, कविता किरण, दीप्ति मिश्र, शकील जमाली और लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने शिकरत की। कार्यक्रम से इतर अशोक चक्रधर ने लाइव हिन्दुस्तान को दिए खास इंटरव्यू में हिंदी भाषा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा की संकीर्णता से बाहर निकलकर आयी है और अब यह विकास के पहिए को रफ्तार दे रही है। 

चक्रधर ने हिंदी दिवस का जिक्र करते हुए कहा, एक भावुक सा वातावरण है। इसमें नकारात्मकता भी है और यह भी एहसास है कि हमारी हिंदी का दिन है। हैरानी की बात यह है कि संविधान में कुल 22 भाषाएं हैं। लेकिन हमारी भाषा के अलावा कोई भी भाषा अपना दिन नहीं मनाती। मुझे लगता है कि यह एक रस्म अदायगी है। 

आज कल अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाना चाहते हैं। वो हिंदी को कम महत्व दे रहे हैं। इस पर अशोक चक्रधर ने कहा, किसी भी भाषा को सीखना बुरा नहीं है। आप जर्मन, फ्रेंच या किसी और बाहरी भाषा को सीखिए। यह आपको फायदा पहुंचाएगी। भाषा संवाद का एक जरिया है। 

 

डॉक्टर चक्रधर ने हिंदी कविता का जिक्र करते हुए कहा, हिंदी की बात करते ही कविता की बात होने लगती है। लेकिन हिंदी जिंदगी की भाषा है, विकास की भाषा है, वह विदेश नीति की भाषा है और यह सद्भावना की भाषा है। उन्होंने हिंदी के विकास पर कहा, हिंदी के लिए रास्ते अपने आप निकलेंगे। लोग कहते हैं कि सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हमारा चौथा नंबर है। लेकिन तीसरा, दूसरा और पहला कौनसा है, पहले इसे निर्धारित कर लें। 

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  • Web Title:Ashok Chakradhar interview Hindi Diwas Kavi Sammelan