अरुंधति रॉय की किताब ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ का लोकार्पण
अरुंधति रॉय की किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ का हिन्दी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ का लोकार्पण अर्थशिला में हुआ। अरुंधति रॉय ने अपने मां के साथ रिश्ते, स्मृति, परिवार और स्त्री-अस्मिता जैसे गहरे प्रश्नों की पड़ताल की है। किताब का 45 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

अरुंधति रॉय की बहुचर्चित किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ के हिन्दी संस्करण ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ का लोकार्पण शनिवार शाम अर्थशिला में एक विशेष समारोह में हुआ। राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस किताब के लोकार्पण में लेखिका अरुंधति रॉय, हिन्दी अनुवादक प्रभात सिंह समेत साहित्यिक-सांस्कृतिक क्षेत्र की कई हस्तियां उपस्थित थीं। लेखिका अरुंधति रॉय ने इस आत्मीय संस्मरण में अपनी मां मैरी रॉय के साथ अपने जटिल, प्रेम और टकराव से भरे रिश्ते के बहाने स्मृति, परिवार, स्त्री-अस्मिता, सत्ता, मातृत्व और आत्म-पहचान जैसे गहरे मानवीय प्रश्नों की पड़ताल की है。
किताब का महत्व
अरुंधति रॉय ने कहा, मां के निधन के बाद अपने जीवन और हमारे रिश्ते को नए सिरे से देखने का अवसर मिला और वही इस किताब की शुरुआत बना। इस किताब का अधिकांश हिस्सा उन्होंने रातों को जागकर लिखा और अगली सुबह उसे फिर से देखा। इस किताब का 45 से ज्यादा भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। हिन्दी में आना मेरे लिए अहम है। किताब में 16 साल की उम्र में मेरे दिल्ली पहुंचने और 18 की उम्र में पूरी तरह घर छोड़ने से लेकर मां के अंतिम क्षणों तक उनके उलझे हुए आपसी रिश्ते की कहानी है। मेरी मां ने मुझे सोचना सिखाया, फिर मेरे विचारों पर गुस्सा किया। उन्होंने मुझे स्वतंत्र होना सिखाया और मेरी आजादी से नाराज हुईं। मां के साथ अपने इस जटिल रिश्ते के बारे में वो कहती हैं कि मुझे लगता है कि मैं अपनी माँ जैसी ही गैंगस्टर हूं। यह किताब जितनी व्यक्तिगत है, उतनी ही सामाजिक और राजनीतिक भी है।
अनुवादक के विचार
अनुवादक प्रभात सिंह ने कहा कि मेरे लिए यह अनुवाद अपनी सारी सिद्धियों और सारे रियाज की कसौटी पर साबित हुआ। इस मौके पर अर्थशिला, पटना की निदेशिका चेतना झा, राजकमल प्रकाशन के सम्पादक सत्यानंद निरुपम और प्रत्यक्षा ने भी अपने विचार रखे।
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