DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जानिए, कैसे मोदी सरकार के सबसे बड़े संकटमोचक थे अरुण जेटली

prime minister narendra modi with former finance minister arun jaitley   pti photo

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में उनके सबसे बड़े संकटमोचक रहे। चुनावों से कुछ महीने पूर्व वह बीमारी के कारण सरकार से दूर होते गए लेकिन उन्होंने तब भी ब्लॉग लिखकर कई मुद्दों पर सरकार के पक्ष को मीडिया के जरिये जनता के सामने लाना जारी रखा।

 
पिछले कार्यकाल में विपक्ष ने जब-जब मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की तो जेटली चट्टान बनकर सामने खड़े हो जाते थे। वह अपने अकाट्य तथ्यों से विपक्ष की रणनीति ध्वस्त कर जनता को संदेश दे देते थे। इतना ही नहीं राजनीतिक अन्तरविरोधों के बावजूद विपक्षी दलों के लिए जेटली की बात का महत्व होता था। 

 

गुजरात दंगों पर मोदी का साथ दिया :
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जेटली अभी ही नहीं, पहले से ही संकट मोचक रहे हैं। 2002 में जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात दंगों को लेकर राजधर्म की बात कही, तो जेटली खुलकर मोदी के बचाव में आए और उन्हें नैतिक समर्थन दिया। मोदी जब दंगों को लेकर कानूनी पचड़ों में घिरे तो भी एक वकील के रूप में जेटली उनके लिए मददगार साबित हुए। 

ये भी पढ़ें: उपराष्ट्रपति नायडू ने जेटली के निधन पर लिखा-सियासी सफर के साथी का जाना

नोटबंदी, राफेल पर जेटली ने मोर्चा संभाला :
पिछली सरकार में संसद के भीतर और बाहर जेटली मोदी सरकार पर मंडराये संकटों को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। नोटबंदी पर जब सरकार घिरी तो इसके फायदों को लेकर सबसे ज्यादा तर्क पूर्ण ढंग से जेटली ने सरकार का बचाव किया। इसी प्रकार राफेल पर संसद के भीतर और बाहर जेटली ने मोर्चा संभाला। उन्होंने समझाया कि किस प्रकार राफेल सौदा देशहित में है और कांग्रेस के आरोप निराधार हैं। आर्थिक भगोड़ों से जुड़े मामले हों, या फिर तीन तलाक जैसे कानून का रास्ता निकालना, सवर्ण आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन हो या कोई भी अन्य कानून जेटली अपनी सूझबूझ से सरकार को न सिर्फ हल सुझाते थे, बल्कि संसद के भीतर और बाहर सक्रिय होकर उसे मुकाम तक भी पहुंचाते थे। 

तर्क सहित जीएसटी के बारे में लोगों को बताया :
इसी प्रकार वित्त मंत्री रहते हुए जीएसटी का क्रियान्वयन का श्रेय भी जेटली को जाता है। लेकिन जीएसटी को लेकर बाद में सरकार को जब कटघरे में खड़ा किया जाने लगा तो जेटली ही आगे आए। उन्होंने न सिर्फ सरकार का पक्ष प्रभावी तरीके से रखा बल्कि बाद में सीएसटी स्लैबों में और कई अन्य प्रक्रियागत बदलाव करके उसे सरल भी बना दिया। केंद्र में नई सरकार कामकाज शुरू कर चुकी है। जेटली अब नहीं रहे। लेकिन इस सरकार में जेटली का विकल्प कोई बन पाएगा, यह कहना मुश्किल है।

विपक्ष भी उनकी बात को अहमियत देता था :
संसद में जेटली की बात को विपक्ष भी अहमियत देता था। इसकी कई वजह थी। भाजपा में रहकर भी वे कट्टर नहीं थे। उनकी छवि उदार थी। कभी-कभी विपक्ष उन्हें ताने देता था कि वे सही नेता हैं लेकिन गलत पार्टी में हैं। वे राज्यसभा में सदन के नेता थे। जब भी वहां किसी मुद्दे पर गतिरोध होता और पक्ष-विपक्ष में तनातनी होती थी और जब संसदीय कार्य मंत्री के फार्मूले से हल नहीं निकल रहा होता, तब जेटली का हस्तक्षेप अहम होता था और विपक्ष भी उसे स्वीकार कर लेता था।

ये भी पढ़ें: उपराष्ट्रपति नायडू ने जेटली के निधन पर लिखा-सियासी सफर के साथी का जाना

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Arun Jaitley was the biggest troubleshooter of Modi government