टीबी की कैसे हो एआई मानीटरिंग, 98 प्रतिशत मरीज एप से अंजान
बागपत में टीबी मरीजों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित खुशी चैटबॉट एप्लीकेशन लॉन्च हुआ है, लेकिन 98 प्रतिशत मरीज इससे अंजान हैं। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत स्पेशल स्क्रीनिंग अभियान चल रहा है, और स्वास्थ्यकर्मियों के द्वारा इस एप के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है।

बागपत। टीबी मरीजों को सहूलियत देने, इलाज आसान बनाने और समय-समय पर उनको परामर्श देने के लिए लांच हुए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित खुशी चैटबॉट एप्लीकेशन से जनपद के 98 प्रतिशत मरीज अंजान हैं। अभी तक केवल दो प्रतिशत मरीजों को ही इसका लाभ मिल पाया है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत प्रदेश में 100 दिन का विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत हाई रिस्क वाले गांव-वार्ड में शिविर लगाकर लोगों की जांच की जा रही है। अभियान शुरू होने के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित खुशी एप भी लांच किया गया। शासन ने निर्देश दिया है कि टीबी मरीजों, निक्षय मित्रों और मरीजों के परिजनों को खुशी चैटबॉट पर अनिवार्य रूप से पंजीकृत कराया जाए। इसके बावजूद अधिकांश जिलों में इस एप के प्रति जागरुकता का अभाव दिखा है। बागपत में अभी तक केवल 15 मरीजों और निक्षय मित्रों ने ही इस एप का उपयोग शुरू किया है। बताया जा रहा है कि टीबी के मरीजों को इस एप की जानकारी ही नहीं है, जिसके चलते उन्होंने अभी तक इस एप को डाउनलोड नहीं किया है। वहीं, टीबी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही यह एप सभी टीबी मरीजों के मोबाइल पर डाउनलोड कराया जाएगा।
क्या है खुशी चैटबॉट एप
खुशी चैटबॉट टीबी मरीजों के लिए तैयार किया गया है। यह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एप्लीकेशन है जिसका उद्देश्य टीबी की रोकथाम, मरीजो के इलाज में सहायता करना है। यह मरीजों को समय पर दवा लेने की याद दिलाता है, जांच की जानकारी देता है और इलाज के दौरान जरूरी सलाह भी उपलब्ध कराता है। पास के स्वास्थ्य केंद्रों के बारे में बताता है। यह एप 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे ग्रामीण और स्थानीय भाषा बोलने वाले मरीज भी इसका उपयोग कर सकते हैं। मरीजों को पोषण आहार, निक्षय योजना और उपचार से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी समय-समय पर भेजी जाती हैं। इससे बार-बार अस्पताल या डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता भी काफी हद तक कम हो सकती है।
कोट-
विशेष स्क्रीनिंग अभियान के समय यह एप लांच किया गया है। इसके बारे में स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षयमित्रों की मदद से जागरुकता फैलाई जा रही है। यह एप्लीकेशन टीबी मरीजों को जांच, इलाज, पोषण आहार समेत कई मामलों में काफी मदद करता है।
डा. यशवीर सिंह, जिला क्षयरोग अधिकारी
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Nazim Azadशॉर्ट बायो:
नाजिम आजाद पिछले 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान बागपत में ब्यूरो प्रभारी के पद पर काम कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
नाजिम आजाद भारतीय मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 27 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान में (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) बागपत जिले के ब्यूरो प्रभारी हैं। बागपत और शामली जनपद में 2008 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने विशेष खबरों के साथ अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए बेहतर प्रदर्शन किया है।
कॅरियर का सफर
नाजिम आजाद ने अपने कॅरियर की शुरुआत 1999 में राष्ट्रीय सहारा अखबार से की। इसके बाद शाह टाईम्स में उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2008 में हिन्दुस्तान के साथ जुड़े। स्टार न्यूज और आजतक जैसे नामचीन न्यूज चैनलों में भी अपनी सेवा दी। 2008 से वे हिन्दुस्तान में लगातार जिले के ब्यूरो प्रभारी के रुप में कार्य कर रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
एमए राजनीति शास्त्र, बीएड के साथ-साथ हिन्दी और पत्रकारिता में स्नातक होने से नाजिम को विज्ञान, हिन्दी और पत्रकारिता का विशेष संयोजन मिला। ब्यूरो प्रभारी रहते हुए एडिटिंग, न्यूज कंटेंट और पैकंजिंग के साथ-साथ टीम के नेतृत्व में पारंगत होने का मौका मिला।
उच्च शिक्षा और लक्ष्य
राजनीति और न्यूज कंटेंट आदि विषयों पर नाजिम की गहरी समझ है। राजनीति और सामाजिक मुददों से जुडी उन्होंने अनेक एक्सक्लूसिव स्टोरी ब्रेक की हैं। नाजिम का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता के साथ सटीक सूचना देने पर केंद्रित है। इसी को केंद्रित करते हुए उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।
विशेषज्ञता
टीम से समन्वय के साथ समय प्रबंधन
डाटा विश्लेषण और इस पर केंद्रित समाचारों की पैकजिंग
इनोवेटिव और रिसर्च बेस्ड न्यूज स्टोरीज


