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अनुच्छेद 370 मामला: केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अब 16 सितंबर को सुनवाई

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जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को रद्द करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली कई सारी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी फैसला नहीं सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की है। जम्मू कश्मीर में संचार पर पाबंदियों सहित अन्य प्रतिबंधों को हटाने की मांग करते हुए ये याचिकाएं दायर की गई हैं। दरअसल, उऩका कहना है कि संचार पर पाबंदियां पत्रकारों के पेशेवर कर्तव्यों को पूरा करने की राह में बाधक बन रही हैं।

अनुच्छेद 370 रद्द करने के फैसले के खिलाफ याचिका अधिवक्ता एमएल शर्मा ने दायर की है, जबकि नेशनल कांफ्रेंस सांसद मोहम्मद अकबर लोन और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हसनैन मसूदी ने जम्मू कश्मीर के संवैधानिक दर्जे में केंद्र द्वारा किये गए बदलावों को चुनौती दी है।

पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल, जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला रशीद और राधा कुमार जैसे प्रख्यात हस्तियों सहित अन्य भी इसमें शामिल हैं। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने भी एक याचिका दायर कर अपनी पार्टी के नेता मोहम्मद तारिगामी को पेश करने की मांग की है, जिन्हें अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है। अनुच्छेद 370 से जुड़े सभी विषय और इसके बाद के घटनाक्रम प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।

बता दें कि कश्मीर में पाबंदियों को लागू हुए एक महीना पूरा हो गया है और घाटी में तनावपूर्ण शांति तथा अनिश्चितता की स्थिति अब भी बनी हुई है। वहीं चार अगस्त की आधी रात को संचार माध्यमों पर लगाए गए प्रतिबंधों और अन्य पाबंदियों में जम्मू और लद्दाख क्षेत्र में राहत दी गई है जहां अपेक्षाकृत हालात बेहतर हैं।

केंद्र सरकार ने पांच अगस्त को संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटा दिया था और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। इसी फैसले के मद्देनजर संचार माध्यमों पर रोक लगा दी गई थी। राज्य प्रशासन कह रहा है कि उसने श्रीनगर और कश्मीर क्षेत्र के अन्य हिस्सों में दिन के वक्त लोगों की आवाजाही पर लगीं लगभग सभी पाबंदियों में ढील दे दी है लेकिन आम जन-जीवन अब भी प्रभावित है और दुकानें बंद हैं और छात्र शैक्षिक संस्थानों से दूर हैं।

जम्मू और लद्दाख में लैंडलाइन फोन की सेवा और कुछ हक तक मोबाइल सेवा की बहाली के बाद हालात अपेक्षाकृत बेहतर हैं। घाटी के विपरीत, इन दो क्षेत्रों में दुकानें, स्कूल और व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले हैं। घाटी में संदिग्ध पोस्टर लगाए गए हैं जो 'असैन्य कर्फ्यू की बात करते हैं और लोगों से 'सविनय अवज्ञा' करने को कहते है। पिछले हफ्ते अपनी दुकान खोलने वाले एक व्यक्ति की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी जिसके बाद लोगों में डर भी है।

भाजपा को छोड़ विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के करीब 60 शीर्ष नेताओं को घरों, गेस्टहाउस और होटलों में हिरासत में रखा गया है। कुछ को राज्य और राज्य की बाहर की जेलों में भी रखा गया है। माना जाता है कि 400 राजनीतिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है।

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