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27 जनवरी, 2020|2:44|IST

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जानें क्या है अनुच्छेद 35 ए, क्यों हो रहा इसका विरोध

अनुच्छेद 35 ए

भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई ने शनिवार को कहा कि पार्टी संविधान के अनुच्छेद 35 ए पर चर्चा करने के लिए तैयार है। जिसके तहत राज्य के स्थायी निवासियों को विशेष दर्जा हासिल है।

इस प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय में छह अगस्त को सुनवाई होने वाली है और इसके खिलाफ राज्य में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।

ऐसे जानें क्या है अनुच्छेद 35ए

अनुच्छेद 35ए को लेकर जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से विरोध है। इस अनुच्छेद के जरिये वहां की सरकार और लोगों को विशेष अधिकार प्राप्त है कि वहां का स्थायी निवासी कैसे तय होगा।

इसके तहत वहां की सरकार को ये अधिकार मिल जाता है कि वो आजादी के वक्त दूसरी जगहों से आए लोगों और देश के अन्य क्षेत्र के लोगों को किस तरह की सहूलियतें दे या नहीं दे। यह अनुच्छेद 14 मई 1954 से जम्मू-कश्मीर में लागू है। तब राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। उनके ही आदेश पर ही यह अनुच्छेद पारित हुआ था।

1956 में बना था जम्‍मू-कश्‍मीर का संविधान

1956 में जब जम्मू कश्मीर का संविधान बना तब इसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया। इस संविधान के तहत स्थायी नागरिक वो व्यक्ति ही है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या 14 मई 1954 से पहले के 10 वर्षों से वहां का नागिरक हो। साथ ही उसने वहां संपत्ति हासिल की हो।

इसलिए है विरोध

बताते चलें कि अनुच्छेद 35ए, धारा 370 का ही एक हिस्सा है। इसकी वजह से दूसरे राज्य के नागरिक जम्मू-कश्मीर में संपत्ति नहीं खरीद सकते। महिलाओं में इस अनुच्छेद का खासा विरोध है।

अगर जम्मू-कश्मीर की किसी महिला की दूसरे राज्य में शादी हो जाती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं। साथ ही उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं।

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