छह लोगों की हत्या का आरोपी 28 साल बाद गिरफ्तार
कायमगंज, संवाददाता। 35 साल पहले छह लोगों की हत्या के मुकदमे में 28 वर्षों से फरार चल रहे आरोपित किशोरीलाल जाटव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी नोएडा में एक निजी कंपनी में नौकरी कर रहा था। घटना से पीड़ित परिवार के सदस्यों ने राहत की सांस ली है।
कायमगंज, संवाददाता । 35 साल पहले छह लोगों की हत्या के मुकदमे में करीब 28 वर्षों से फरार चल रहे वांछित आरोपित को कोतवाली पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी जमानत पर छूटने के बाद अपनी पहचान बदलकर नोएडा में रह रहा था और निजी कंपनी में नौकरी कर रहा था। वर्ष 1991 में छह लोगों की हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। कोतवाली क्षेत्र के लखनपुर गांव में 11 अगस्त 1991 को छह लोगों की हत्या के मामले में पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी गांव के ही आरोपित किशोरीलाल जाटव को गिरफ्तार किया है।
प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ल ने बताया वह जमानत पर रिहा होने के बाद से ही फरार चल रहा था। करीब 28 वर्षों से वह अपना नाम और पता बदलकर नोएडा में रह रहा था। पुलिस के अनुसार 1991 में लखनपुर निवासी झब्बूलाल जाटव की ओर से तहरीर के आधार पर कोतवाली में धारा 302/34 भादवि दर्ज किया गया था। मुकदमे में कृष्ण मास्टर, रामसेवक और किशोरी पुत्र नन्हेंलाल जाटव को आरोपित बनाया गया था। आरोप था कि आरोपितों ने 50 वर्षीय गुलजारी, उनकी 45 वर्षीय पत्नी रामवती, 15 वर्षीय बेटे राकेश, 11 वर्षीय उमेश, 8 वर्षीय धर्मेन्द्र और 60 वर्षीय बाबूराम पुत्र चिरोंजी की हत्या कर दी थी। मामले में तीनों आरोपियों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। पुलिस के अनुसार उनके खिलाफ आरोप पत्र 26 अगस्त 1991 को न्यायालय में दाखिल किया गया था। बाद में तीनों जमानत पर बाहर आ गए थे। इसी मुकदमे से संबंधित किशोरीलाल जमानत के बाद लगातार फरार चल रहा था। प्रभारी निरीक्षक ने बताया फरारी के दौरान किशोरीलाल ने अपनी पहचान बदल ली। वह दीपक निवासी गगनपुरी, निधौली कलां, जनपद एटा के नाम से नोएडा में रहने लगा। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह एक प्राइवेट लिमिटेड में डिजाइनिंग विभाग में ईएमबी टेलर के पद पर 13 अक्तूबर 2025 से नौकरी कर रहा था。
बचपन की दहशत नहीं भूला मदनलाल
कायमगंज। लखनपुर हत्याकांड में आरोपित किशोरीलाल की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही मृतक गुलजारी लाल के बेटे मदन लाल और रमेश की आंखों में वर्षों बाद राहत दिखाई दी। मदन ने बताया कि घटना के समय वह महज छह साल का था। जान बचाने के लिए वह डर के मारे चारपाई के नीचे छिप गया था। इसी वजह से उसकी जान बच सकी। उसका भाई रमेश उस समय दिल्ली गया हुआ था, जबकि राजेश घर पर नहीं था। मदन के मुताबिक गांव के एक युवक का पड़ोस की युवती से प्रेम प्रसंग था। युवक युवती को लेकर चला गया था। इसी रंजिश में उसके परिवार पर हमला कर छह लोगों की काट कर निर्मम हत्या कर दी गई थी। उसने बताया कि जिला सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने छह साल के बच्चे की गवाही को स्वीकार नहीं किया और आरोपित तीनों छूट गए थे इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मदन के अनुसार वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माने का आदेश दिया था।


