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30 नवंबर, 2020|12:27|IST

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आर्मी चीफ के नेपाल दौरे से फिर पटरी पर लौटेगा रिश्ता? जानिए क्या हो सकता है केपी ओली का रुख

army chief nepal visit

काठमांडू के साथ 45 दिन तक चली 'बैक चैनल डिप्लोमैसी' की परीक्षा इस सप्ताह उस समय होगी, जब सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से मुलाकात करेंगे और तिब्बत में मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख होते हुए सड़क निर्माण से शुरू हुए विवाद को दफनाने की कोशिश करेंगे। इस दौरान जनरल नरवणे को राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी नेपाल सेना प्रमुख की मानद उपाधि देंगी। भारतीय सेना प्रमुख का तीन दिवसीय नेपाल दौरा 4 नवंबर को शुरू होने जा रहा है। 

अलंकरण समारोह के बाद पीएम ओली रक्षा मंत्री की हैसियत से आर्मी चीफ से मुलाकात करेंगे। इस बात के कई संकेत मिल रहे हैं कि जनरल नरवणे का काठमांडू में रेड कार्पेट से स्वागत होगा, क्योंकि ओली सरकार महाकाली नदी पर पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना के अलावा भारत के साथ कई दूसरे हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रॉजेक्ट शुरू करना चाहती है। 

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पंचेश्वर ड्राफ्ट डीपीआर पर दोनों देशों की टेक्निकल टीमें चर्चा कर रही हैं और 80 फीसदी मुद्दे आपसी विचार-विर्मश से सुलझाए जा चुके हैं। भारत की एसजेवीएन 900 मेगावाट का अरुण-3 प्रॉजेक्ट का निर्माण कर रही है और जीएमआर की ओर से 900 मेगावाट का करनाली हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ रहा है। 

भारत मानता है कि कालापानी नक्शाविवाद नेपाल की घरेलू राजनीति का परिणाम है और इसलिए काठमांडू से दोस्ती का हाथ मिलाना चाहता है। दो करीबी पड़ोसियों के बीच सदियों पुराने संबंधों को बहाल करने के लिए आंतरिक तकरार से ऊपर उठना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद नेपाल के साथ संबंधों को गहरा बनाने में रुचि रखते हैं और उन्होंने यह साफ किया है कि काठमांडू का नई दिल्ली के साथ एक विशेष स्थान है, चाहे सत्ता में कोई भी पार्टी रहे। 

वास्तव में भारत नेपाल में शिक्षा, स्वास्थ्य और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में महत्वपूर्ण योगदान के प्लान पर विचार कर रहा है।

एजुकेशन: भारत ने पिछले सालों में काफी निवेश किया है, लेकिन स्कूल और अकादमिक संस्थाओं के निर्माण में नेपाल की मदद की बहुत आवश्यकता है। भारत नेपाल के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों में भी शिक्षा के लिए सुविधाओं का विकास कर सकता है, जबकि भारत में अध्ययन के लिए बड़ी संख्या में हिमाल क्षेत्र के विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप दे सकता है। 

स्वास्थ्य: भारत स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास में भी नेपाल की मदद कर सकता है। सुदूर उत्तरी इलाकों में छोटे-छोटे विशेषज्ञ अस्पताल बनाए जा सकते हैं। हिमालयी गणराज्य में प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए दोनों देशों के चिकित्सकों के बीच गहन जुड़ाव की आवश्यकता है और नई दिल्ली से महत्वपूर्ण मेडिकल आपूर्ति की मदद की जरूरत है। 

इन्फ्रास्ट्रक्चर: भारत और नेपाल को दूरदराज के इलाकों में सड़क, पुल, आधारिक संरचना बनाने की आवश्यकता है। चीन पहले ही इस क्षेत्र में घुस चुका है और उसने काठमांडू के चारों ओर रिंग रोड का निर्माण किया है। दोनों देश को ऐसे जगहों की पहचान करनी है जहां बांधों को मजबूत किया जाना है ताकि बाढ़ों को रोका जा सके। 

पानी की कमी: भारत को नेपाल के साथ ऊंचे इलाकों में पानी की कमी को दूर करने के लिए विशेषज्ञता साझा करने की आवश्यकता है। 

कृषि: भारत नेपाल के लिए खाद की आपूर्ति करता रहा है, लेकिन नई दिल्ली पर पुराने अग्रीमेंट को रिन्यू नहीं किए जाने का आरोप लगाए जाने के बाद से यह रुका हुआ है। इस मुद्दे को प्राथमिकता पर सुलझाए जाने की जरूरत है क्योंकि काठमांडू इस कमी को पूरा करने के लिए चीन या बांग्लादेश की ओर देख रहा है। 

दोनों देशों को सीमा आर-पार कनेक्टिविटी को बढ़ाने की जरूरत है, इसके लिए सीमा पर व्यापार केंद्रों में वृद्धि की जा सकती है और साथ में आव्रजन और सीमा शुल्क सुविधाओं का विकास किया जा सकता है। इसके अलावा भारत और नेपाल सिमकोट और नेपालगंज एयरपोर्ट्स का विकास कर सकते हैं, जिनका इस्तेमाल भारतीयों की ओर से मानसरोवर यात्रा के लिए किया जाता है।  

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  • Web Title:Army Chief MM Naravane Nepal visit to break ice kp Oli wants Pancheshwar project revived