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अर्जन वेल्ली ने पैर जोड़ के गंडासी मारी... सिखों का वह सरदार जिसने चटाई थी अंग्रेजों को धूल, अब हो रही खूब चर्चा

Arjan Vailly Song: रणबीर कपूर स्टारर एनिमल फिल्म के इस गाने की चर्चा हर ओर है। इस गाने में सिखों के कमांडर अर्जन वैली का जिक्र किया गया है। आइए जानते हैं कौन थे अर्जन वैली?

अर्जन वेल्ली ने पैर जोड़ के गंडासी मारी... सिखों का वह सरदार जिसने चटाई थी अंग्रेजों को धूल, अब हो रही खूब चर्चा
Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 07 Dec 2023 08:07 PM
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Arjan Vailly Song: रणबीर कपूर स्टारर, डायरेक्टर संदीप वांगा रेड्डी की फिल्म 'एनिमल' का गाना 'अर्जन वेल्ली ने पैर जोड़ के गंडासी मारी' इन दिनों लोगों की जुबान पर चढ़ गया है। साउथ की फिल्मों के स्टार डायरेक्टर संदीप वांगा रेड्डी ने जिस तरह से इस गाने को फिल्म में फिल्माया है, इसके लिए उनकी काफी तारीफ हो रही है। यह गाना इन दिनों जोश का सिंबल बन गया है। इस गाने में सिख सैन्य कमांडर हरि सिंह नलवा के बेटे अर्जन वैली का जिक्र किया गया है, मगर इस बारे में बहुत कम लोगों को मालूम है कि आखिर अर्जन वैली कौन हैं।

अंग्रेजों पर भारी पड़े थे अर्जन वैली

अर्जन वैली सिख समुदाय के महान योद्धा हरि सिंह नलवा के बेटे थे जिनका जन्म लुधियाना के पास काउंके गांव के पास हुआ था। हरि सिंह नलवा महाराजा रणजीत सिंह की खालसा सेना के महान नायक थे और उनकी वीरता इतिहास में दर्ज है। वे इतने बहादुर थे कि उन्होंने एक शेर को भी मार डाला था। हरि सिंह नलवा के दो बेटे थे अर्जन सिंह और जवाहर सिंह। दोनों ने ब्रिटिश शासकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। अर्जुन सिंह नलवा अपने पिता की तरह बहादुर थे। हरि सिंह नलवा के मौत के बाद बेटे अर्जन सिंह ने अपने पिता की सौंपी जिम्मेदारी और कमान संभाली थी। पिता के बाद अर्जन सिंह ने डटकर अंग्रेजों का सामना किया था।

क्यों है इतनी चर्चा

गाने में वैली शब्द (पंजाबी में वेल्ली) का मतलब है वह व्यक्ति जो युद्ध से नहीं डरता और अपने अधिकारों के लिए लड़ता है। इस गाने में अर्जन सिंह की बहादुरी की कहानी बताई गई है। फिल्म एनिमल में इस गाने को पंजाबी सिंगर भूपिंदर बब्बल ने गाया है। इस गाने की शैली को लेकर भी काफी चर्चाएं हैं। बता दें इस तरह के गीत को मुगलों से लड़ते वक्त श्री गुरु गोबिंद सिंह के लिए ढाड़ी जत्थे ने तैयार किया था, ताकि अपने सैनिकों में उत्साह भर सके।

गुरु गोबिंद सिंह से है खास कनेक्शन

सिखों के दसवें गुरु ने इस गीत का इस्तेमाल मुगलों के खिलाफ लड़ते वक्त अपने सैनिकों में जोश भरने के लिए किया करते थे। यह गाना उस समय सिख सेनाओं के लिए युद्ध घोष के समान था। इन गीतों को गाने के दौरान योद्धा डमरू जैसी ढाड़ी का इस्तेमाल किया करते थे। पहले इस पर पंजाब के मशहूर लोक गायक कुलदीप मानक ने ढाड़ी वारों के रूप में गाया था।

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