अतीत के पन्नों में दबी है अररिया के क्रांतिकारियों की अनकही कहानी
फुलेन्द्र कुमार मल्लिक अररिया। अररिया का गौरशाली अतीत रहा है। यहां के अतीत के पन्नों

फुलेन्द्र कुमार मल्लिक अररिया।
अररिया का गौरशाली अतीत रहा है। यहां के अतीत के पन्नों पर एक से बढ़कर एक स्वतंत्रता सेनानियों की अनकही कहानी दबी पड़ी मिलेगी, जिन्होंने मातृभूमि को गोरे सरकार से मुक्त कराने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। अंग्रेजों की गोलियां खायी, लेकिन कभी आह तक नहीं बोले। आज के युवा पीढ़ियों को इनके संघर्ष और शहादत से संघर्ष लेने की जरूरत है।
अररिया के स्वतंत्रता सेनानी
कहा जाता है कि आजादी के ये रणबांकुरे कई वर्षों तक गुमनामी के अंधेरे में दर-दर भटकते रहे और अन्तत: वतन के लिए शहीद हो गये। क्रांतिकारियों की जब भी चर्चा होती है तो सबसे पहले पंडित रामदेनी तिवारी द्विजदेनी का नाम आता है। द्विजदेनी जी न केवल क्रांति का बिगुल फूंका बल्कि अपनी लेखनी से लोगों के मन में राष्ट्रप्रेम का भाव जगाकर फिरंगियों से लड़ने के लिए उनमें जोश भी जगाया। इन्होंने अंग्रेजों से काफी यातनाएं सही और 1943 में भागलपुर सेन्ट्रल जेल में शहादत प्राप्त की। रानीगंज के जगत हाजरा व कालीदास अंगे्रजों की लाठिया खायी तो सुन्दर ततमा अंगे्रजी फौज की बंदूकों के शिकार हुए।
निष्कर्ष
लाल कुर्ती दल के सक्रिय सदस्य थे कन्हैया लाल वर्मा: अररिया आरएस के कन्हैया लाल वर्मा सीमांत गांधी के उपनाम से चर्चित अब्दुल गफ्फार खान के लाल कुर्ती दल के सक्रिय सदस्य रहे तथा पेशावर जेल (अब पाकिस्तान) में बंद रहकर अनेक तरह की यातनाएं सहते रहे। नरपतगंज के रामलाल मंडल के बारे में कहा जाता है कि वे अंगे्रजी हुकूमत की यातनाएं सहकर महात्मा गांधी के सानिध्य में रहकर उन्हें रामायण सुनाने का सुअवसर प्राप्त किया। जोकीहाट प्रखंड अन्तर्गत जहानपुर गांव के पंडित पुण्यानंद झा 1918 में ब्रिटिश हुकूमत की क्रुरता व रॉलेट एक्ट के विरोध में स्कूल छोड़कर गांधीजी के असहयोग आंदालन में कूद पड़े थे। स्वतंत्रता सेनानी राधा मोहन सिंह नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के आजाद हिन्द फौज के सक्रिय सदस्य थे और इनके नाम से अंग्रेजों की रूहें कांप उठती थी।
स्वतंत्रता सेनानियों का कार्यक्षेत्र
स्वतंत्रता सेनानियों का कार्यक्षेत्र रहा है अररिया: नरपतगंज के शिवराज सिंह, अररिया आरएस के पंडित रामाधार द्विवेदी, तेतर पासवान, फारबिसगंज के बोकाई मंडल,बाबू बसंत सिंह सहित अमर कथा शिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु भी यहां के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। अशर्फी भगत, लक्ष्मण खतवे, माधव मिश्र, हरि लाल साह, कमलानंद विश्वास जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का कार्यक्षेत्र अररिया जिला ही रहा है। इन्होंने देश को आजादी दिलाने में अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। इनके संघर्ष व शहादत की कहानी आज भी रौंगटे खड़ी कर देती है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय यहां की धरती पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, अब्दुल गफ्फार खान, जय प्रकाश नारायण, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह जैसे महापुरूषों के पैर पड़े थे।


