सरकार को चुनाव आयोग के अधिकारियों की नियुक्ति से रोकें, सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस

सरकार को चुनाव आयोग के अधिकारियों की नियुक्ति से रोकें, सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस

संक्षेप:

कांग्रेस नेता ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है कि 2023 के फैसले को देखते हुए केंद्र सरकार को आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से अलग रखा जाए।

Mar 11, 2024 10:48 am ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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चुनाव आयोग में दो आयुक्तों की नियुक्ति का मामला सुप्रम कोर्ट पहुंच गया है। अरुण गोयल के इस्तीफे के बाद  खबर थी कि इसी सप्ताह केंद्र सरकार दो आयुक्तों को नियुक्त कर सकती है। अब कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है कि 2023 के फैसले को देखते हुए केंद्र सरकार को आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से रोक दिया जाए। बता दें कि फरवरी में अरुप चंद्रा भी चुनाव आयुक्त के पद से रिटायर हो गए थे। ऐसे में इस समय चुनाव आयोग के पैनल में केवल एक ही आयुक्त हैं और वह हैं मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार।

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में अभी सीईसी ऐक्ट 2023 की वैधता का मामला लंबित है। इस कानून को लेकर विवाद इसलिए हुआ था क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाले पैनल से सीजेआई को हटा दिया गया था।  हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। बता दें कि सीईसी कानून के मुताबिक प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्रीऔर लोकसभा में विपक्ष के नेता  वाली समिति चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कर सकती है।

खबर है कि 13 और 14 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में पैनल की बैठक हो सकती है। नियम यही है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के अतिरिक्त दो आयुक्त होते हैं। अरुण गोयल राजीव कुमार के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की कतार में थे। उनका कार्यकाल अभी दिसंबर 2027 तक था। हालांकि उन्होंने बीच में ही इस्तीफा दे दिया। सूत्रों का कहना है कि इसकी वजह मुख्य चुनाव आयुक्त और अरुण गोयल के बीच किसी फाइल को लेकर मतभेद था। हालांकि गोयल ने इस्तीफा देते हुए निजी कारणों का हवाला दिया था। 


जया ठाकुर का कहना है कि 2023 का कानून अनूप बरानवाल बनाम केंद्र सरकार के मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करता है।  इसके अलावा यह देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा के भी खिलाफ है। चुनाव आयोग में शीर्ष अधिकारियों की चयन निष्पक्ष होना जरूरी है लेकिन इस पैनल में केंद्र सरकार ही हावी रहेगी। इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से प्रतिक्रिया मांगी ती। हालांकि कानून पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। 

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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