अभाविप की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक एर्नाकुलम में शुरू
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की बैठक एर्नाकुलम, केरल में शुरू हुई। सोलंकी ने बताया कि एंटी पेपर लीक अधिनियम परीक्षा माफियाओं पर नकेल कसने में मदद करेगा। परिषद विभिन्न विषयों पर चर्चा कर रही है और छात्रों की मेहनत को न्याय दिलाने हेतु विभिन्न उपायों पर बल दिया गया।

- परीक्षा माफियाओं पर नकेल कसने में मील का पत्थर साबित होगा एंटी पेपर लीक अधिनियम एर्नाकुलम, (विसं)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की दो-दिवसीय केंद्रीय कार्यसमिति बैठक शनिवार को केरलम के एर्नाकुलम में शुरू हुई। बैठक में अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो घुराज किशोर तिवारी, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी तथा राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान समेत देशभर के सभी राज्यों से प्रमुख अभाविप कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं। सोलंकी ने कहा कि एंटी पेपर लीक अधिनियम परीक्षा माफियाओं पर नकेल कसने में मील का पत्थर साबित होगा।
बैठक के विषय
एबीवीपी की इस बैठक में शिक्षा, तकनीकी, पर्यावरण, सेवा, खेल, कला, समाज तथा समसामयिक विषयों सहित विभिन्न महत्त्वपूर्ण विषयों पर चिंतन-मंथन किया जा रहा है। परिषद का मानना है कि लाखों विद्यार्थियों की मेहनत और संघर्ष को न्याय दिलाने की दिशा में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन अधिनियम, 2026 को स्वीकृति प्रदान किया जाना परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण और दूरगामी कदम है। साथ ही, राष्ट्रीय फॉर्मेसी आयोग विधेयक, 2026 पर अभाविप द्वारा मंत्रालय को अपने विस्तृत सुझाव भी प्रेषित किए गए हैं, जिनमें फॉर्मेसी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, विद्यार्थी-केंद्रित एवं रोजगारोन्मुख बनाने तथा आयोग में अकादमिक विशेषज्ञों का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया है।
छात्रों की समस्याएं
एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो रघुराज किशोर तिवारी ने कहा कि विद्यार्थियों की वास्तविक समस्याओं का समाधान होना चाहिए, लेकिन उनके नाम पर किसी भी प्रकार के राष्ट्रविरोधी या राजनीतिक एजेंडे को स्वीकार नहीं किया जा सकता। महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि अभाविप का स्पष्ट मत है कि विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान हिंसा, अराजकता, तोड़फोड़ अथवा राजनीतिक एजेंडे के माध्यम से नहीं बल्कि संवाद, लोकतांत्रिक प्रक्रिया, संस्थागत सुधार और पारदर्शी व्यवस्था से ही संभव है।
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