पौड़ी क्रांति दिवस पर जयानन्द भारती को दी श्रद्धांजलि
पौड़ी में 6 सितंबर 1932 की पौड़ी क्रांति के नायक कर्मवीर जयानन्द भारती को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। जयानन्द भारती ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन किया और सामाजिक समानता के लिए भी संघर्ष किया। यह कार्यक्रम उनके साहस और विचारों को नई पीढ़ी के सामने लाने के लिए आयोजित हुआ।
पौड़ी। 6 सितंबर 1932 की ऐतिहासिक पौड़ी क्रांति के महानायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं समाज सुधारक कर्मवीर जयानन्द भारती को पौड़ी में श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। प्रादेशिक शिल्पकार कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर उनके राष्ट्रभक्ति, सामाजिक चेतना और जनसेवा के योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि 6 सितंबर 1932 को तत्कालीन अंग्रेज गवर्नर मैलकम हेली के पौड़ी आगमन के दौरान जयानन्द भारती ने अंग्रेजी शासन के विरोध में तिरंगा लहराते हुए नारे लगाए थे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और बाद में एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
यह घटना आज पौड़ी क्रांति या पौड़ी कांड के नाम से इतिहास में दर्ज है। जयानन्द भारती ने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ सामाजिक समानता और शिल्पकार समाज के अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया। डोला-पालकी आंदोलन के जरिए उन्होंने सामाजिक भेदभाव और रूढ़ियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस अवसर पर पूर्व जिलाधिकारी सुंदर लाल ने कहा कि जयानन्द भारती का जीवन साहस, संघर्ष, सामाजिक न्याय और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को उनके संघर्ष और विचारों से परिचित कराना जरूरी है।कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष हरीश चंद्र शाह, प्रदेश कोषाध्यक्ष हुक्म सिंह टम्टा, कुसुम शाह, एससी विभाग के जिलाध्यक्ष श्रीकांत, राकेश मंद्रवाल, सौरभ सागर आदि मौजूद रहे।


