जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान के गढ़वाल क्षेत्रीय केंद्र में वार्षिक दिवस समारोह
देहरादून में जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान के गढ़वाल क्षेत्रीय केंद्र में वार्षिक दिवस समारोह और 13वीं लोकप्रिय व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया। इसमें हिमालयी पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन और वैज्ञानिक अनुसंधान पर चर्चा की गई। प्रो. आरके मैखुरी ने इस विषय पर अपने विचार साझा किए।
देहरादून। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान के गढ़वाल क्षेत्रीय केंद्र, श्रीनगर में गुरुवार को वार्षिक दिवस समारोह एवं 13वीं लोकप्रिय व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन तथा बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य के बीच वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. आरके मैखुरी, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल रहे।इस अवसर पर प्रो. आरके मैखुरी ने 13वीं लोकप्रिय व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने हिमालयी पर्यावरण की संवेदनशीलता, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों, स्थानीय समुदायों और नीति-निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। गढ़वाल क्षेत्रीय केंद्र के प्रमुख डॉ. केचंद्र शेखर ने संस्थान एवं केंद्र द्वारा संचालित विभिन्न अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों के सतत विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि गढ़वाल विवि की जैव प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. पूजा सकलानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने हिमालयी पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में आधुनिक विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी तथा अंतर्विषयक अनुसंधान की महत्ता पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुसुम पांडे, वैज्ञानिक-सी ने किया। कार्यक्रम में डॉ. मिथिलेश सिंह, वैज्ञानिक-ई, अरुण जुगरान, वैज्ञानिक-ई, संस्थान के वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।


