दुग्ध उत्पादन बढ़ाने वाले पशुपालकों को मिलेगा पुरस्कार
बक्शा ब्लॉक परिसर में उपकृषि निदेशक ने 19 और 20 सितंबर को वाराणसी में होने वाले पशु मेले की तैयारियों और किसानों की सहभागिता की समीक्षा की। उन्होंने किसानों को मेले में पुरस्कार पाने की जानकारी दी। पशुपालक गायों और भैंसों से दूध उत्पादन के आधार पर मेला में भाग ले सकेंगे।

नौपेड़वा, हिन्दुस्तान संवाद। बक्शा ब्लॉक परिसर में शुक्रवार को उपकृषि निदेशक ने बैठक कर 19 और 20 सितंबर को वाराणसी में होने वाले पशु मेले की तैयारियों और किसानों की सहभागिता की समीक्षा की।
पशुपालकों के लिए जानकारी
उन्होंने प्रगतिशील किसानों, एफपीओ और पशुपालकों को ‘रंगीलो काशी’ कार्यक्रम की जानकारी दी। उपकृषि निदेशक डॉ. अश्विनी सिंह ने बताया कि मेले में देशी और विदेशी नस्ल की गायों के दुग्ध उत्पादन के आधार पर निर्धारित लक्ष्य के अनुसार किसानों को पुरस्कार दिए जाएंगे।
मेले में भागीदारी की शर्तें
उन्होंने बताया कि देसी नस्ल में गिर, साहीवाल, थारपारकर और गंगातिरी गाय पालने वाले किसान, जबकि विदेशी नस्ल में जर्सी गाय पालने वाले पशुपालक प्रतिभाग कर सकते हैं। भैंस पालने वाले किसान भी मेले में हिस्सा ले सकेंगे। बताया कि देसी नस्ल की गाय से प्रतिदिन 15 लीटर, विदेशी नस्ल की गाय से 25 से 50 लीटर और भैंस से प्रतिदिन 18 लीटर दूध उत्पादन करने वाले पशुपालक मेले में प्रतिभाग कर सकते हैं।
वैज्ञानिकों की सहभागिता
उपकृषि निदेशक बक्शा ने केंद्र के वैज्ञानिकों को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में होने वाले कृषि पशु मेले की जानकारी दी और पात्र किसानों को इसमें शामिल कराकर लाभान्वित करने पर जोर दिया। इस दौरान पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. पवन कुमार, एडीओ एजी अनुराग सिंह, केंद्र प्रभारी अधिकारी वैज्ञानिक डॉ. कंचन, डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. हरिओम वर्मा सहित सत्येंद्र सिंह, पारसनाथ यादव, विद्याधर, शरद कुमार सिंह, रामआसरे, रमाशंकर, रामप्रसाद यादव, रायबहादुर, संत प्रसाद सिंह, गौरव मौर्य, बिंदु सरोज और जगदीश तिवारी मौजूद रहे।


