18 माह से मानदेय नहीं, रोजगार सेवकों में नाराजगी
24 हजार रुपये मानदेय, बकाया भुगतान और लंबित घोषणाएं लागू करने की मांग पूर्व विधायक उदयभान करवरिया को सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन, 20 जुलाई के बा
प्रदेश के ग्राम रोजगार सेवकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। वर्षों से कम मानदेय, लंबित भुगतान और सरकार की घोषित सुविधाएं लागू न होने से नाराज ग्राम रोजगार सेवकों ने आंदोलन तेज करने का संकेत दिया है। रविवार को ग्राम रोजगार सेवक पंचायत मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले बड़ी संख्या में रोजगार सेवकों ने बारा के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि 20 जुलाई तक सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो लखनऊ में वृहद आंदोलन किया जाएगा। जिला महामंत्री सुनील त्रिपाठी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2008 से मनरेगा योजना में कार्यरत ग्राम रोजगार सेवकों को शुरुआती दौर में मात्र दो हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया गया था।
करीब 18 वर्ष बीतने के बाद भी उन्हें केवल 7,788 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है, जो वर्तमान महंगाई में परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है। ज्ञापन में मुख्यमंत्री की 4 अक्टूबर 2021 को लखनऊ के डिफेंस एक्सपो मैदान में आयोजित सम्मेलन में की गई घोषणाओं का भी उल्लेख किया गया। रोजगार सेवकों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने, ईपीएफ, एचआर पॉलिसी, 14 दिन का चिकित्सीय अवकाश तथा 24 दिन का आकस्मिक अवकाश देने की घोषणा की थी। हालांकि मानदेय वृद्धि के अलावा अन्य अधिकांश घोषणाएं आज तक धरातल पर लागू नहीं हो सकीं।ज्ञापन सौंपने वालों में कौड़िहार ब्लॉक अध्यक्ष सुनील सिंह, महामंत्री सत्यम गुप्ता, श्रृंगवेरपुरधाम ब्लॉक अध्यक्ष कृष्ण कुमार, सोमेश त्रिपाठी, प्रदीप दुबे, अवनीश द्विवेदी, अशोक मिश्र, राजेश गौतम, अवधेश सरोज, भूपेंद्र सिंह, शिवाशंकर प्रजापति, मो. अख्तियार अहमद समेत बड़ी संख्या में ग्राम रोजगार सेवक मौजूद रहे।


