हीमोग्लोबीन की कमी : छह अलग-अलग वर्गों के बीच जांच अभियान शुरु
-30 नवम्बर तक चलेगा अभियान पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। हीमोग्लीबीन की मात्रा जानने के लिए जिले में जांच अभियान शुरू किया गया है। 25 अगस्त से शुरू

पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। हीमोग्लीबीन की मात्रा जानने के लिए जिले में जांच अभियान शुरू किया गया है। 25 अगस्त से शुरू हुआ जांच अभियान 30 नवम्बर तक चलेगा। यह जानकारी जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सोरेन्द्र कुमार दास ने दी। कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न आयु वर्गों के बीच एनीमिया की कमी वाले लोगों की पहचान कर उनके बीच जागरुकता और उपचार कार्यक्रम चलाना है ताकि ऐसे सभी लोगों को पूरी तरह से स्वस्थ्य रखा जा सके। उन्होंने बताया कि इस अभियान को मुख्य रूप से सभी स्कूल, स्वास्थ्य उपकेन्द्र, आरोग्य मंदिर आदि जगहों पर पिछले एक सप्ताह से चलाया जा रहा है। कार्यक्रम मुख्य रूप से एएनएम, बीएचओ समेत केन्द्र के अन्य कर्मी के माध्यम से चलाया जा रहा है। इस जांच अभियान में स्थल पर ग्लूकोमीटर के माध्यम से चिन्हित वर्ग के बीच जांच का कार्य चल रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से इस तरह के कार्यक्रम चलाने के पीछे एनीमिया से जूझ रहे लोगों को अन्य स्वास्थ्य परेशानी से बचाना है। एनीमिया से कई तरह की परेशानी लोगों के सामने खड़ी हो जाती है। इसलिए इस पर सरकार की तरफ से विशेष रूप से फोकस किया जा रहा है。
बच्चों से लेकर गर्भवती महिलाओं की जांच :
जिला स्वास्थ्य समिति के डीएमईओ आलोक कुमार ने बताया कि एनीमिया को लेकर 5 से 9 वर्ष के बच्चों के साथ छह अलग अलग आयु वर्गों के लोगों की रक्त की जांच की जा रही है। बच्चे से लेकर गर्भवती महिला और अन्य वर्ग के लोग शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से 5 से 9 वर्ष के बच्चे, उच्च विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों में 10 से 19 वर्ष के बीच के बच्चों, इनके अलावा 6 से 10 माह के बच्चे की भी जांच होगी। अन्य वर्ग में 20 से 49 वर्ष की गर्भवती महिलाएं एवं इसी वर्ग में लड़कियों की भी जांच होगी। 20 से 49 में कोई भी उम्र के लोग हो, उसकी भी जांच की जा रही है। अभियान में लगने वाले मेडिकल टीम यानी पारा मेडिकल स्टॉफ की भी जांच होगी। इसे पहली बार इस अभियान में शामिल किया गया है।
बोले सिविल सर्जन:
सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि जिले में 25 अगस्त से एनीमिया की जांच शुरू है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए बीच के दिनों में सरकार के स्तर से दिशा निर्देश भी दिए गए थे। इस आलोक में अभियान को आगे बढ़ा दिया गया है। निर्धारित समय के अंदर सभी लक्षित वर्ग के बीच जांच का काम शुरु है। इस दिशा में सबंधित कर्मियों को जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं।


