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विश्लेषण : अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार के साहसिक पहल से बदलेगी तस्वीर

prime minister narendra modi

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का मोदी सरकार का फैसला न सिर्फ ऐतिहासिक है बल्कि अत्यंत साहसिक भी। नोटबंदी, पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक और पाकिस्तान में घुसकर एयर स्ट्राइक करने जैसे दमदार फैसले लेने वाली मोदी सरकार ने एक बार फिर दिखा दिया है कि किसी समस्या से निपटने के लिए उसके पास राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी नहीं है।

करीब सात दशक से चली आ रही एक व्यवस्था को खत्म किए जाने से भले ही घाटी में कुछ प्रतिकूल प्रतिक्रिया भविष्य में देखने को मिले लेकिन इस फैसले पर करीब-करीब पूरा देश सरकार के साथ खड़ा दिखता है। दरअसल, कश्मीर में जारी आतंकवाद में बड़े पैमाने पर जवानों के शहीद होने और दशकों से स्थिति जस की तस बनी रहने से लोगों की उम्मीदें खत्म होने लगी थी। लोगों को लगता था कि कभी कश्मीर की स्थिति नहीं बदल सकती। क्योंकि कभी किसी सरकार ने उसे दूर करने के ठोस प्रयास ही नहीं किए। पर इस फैसले से लोगों की लगने लगा है कि यह कश्मीर में बड़े बदलाव के लिए उठाया गया कदम है।

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एक सोच यह बनी है कि जब अनुच्छेद 370 के कायम रहने से 70 सालों में कश्मीर की स्थिति नहीं सुधरी तो अब मोदी-शाह के इस प्रयोग को भी परखा जाना चाहिए। एक बात और मोदी सरकार ने यह कदम ऐसे वक्त में उठाया है जब आतंकवाद के मुद्दे पर पाक वैश्विक दबाव में घिर चुका है। दूसरे, कश्मीर में सुरक्षाबलों के अभियान में आतंकियों की कमर टूटी है। कहने का तात्पर्य है कि चोट सही वक्त पर की गई है इसलिए सफलता की उम्मीद ज्यादा है।

राजनीति और सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है केंद्र ने एक साथ कई उपाय किए हैं। अनुच्छेद 370 खत्म कर वहां संविधान को पूरी तरह से लागू किया गया है तथा कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म किया गया है। वह भी अब देश के अन्य प्रांतों की भांति होगा। इसी प्रकार जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के जरिए भी राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की तैयारी हो चुकी है।

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राजनीतिक भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी
कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित कर राज्य की राजनीति और प्रशासन को स्थानीय राजनेताओं के शिकंजे से मुक्त कर दिया है जो पृथकतावादियों के सुर में सुर मिलाते हैं। दूसरे इससे वहां बड़े पैमाने पर जारी राजनीतिक भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं और उसे आतंकवाद से दूर रखते हुए अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया है। जबकि जम्मू-कश्मीर का नियंत्रण पर सीधे केंद्र के हाथों में होगा। वहां उप राज्यपाल की ताकत ज्यादा होगी और निर्वाचित सरकार की सीमित।

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  • Web Title:Analysis Article 370 Revoked Jammu Kashmir Narendra Modi Govt Daring Step