Amrita Pritam 100th birth anniversary Google made doodle - अमृता प्रीतम की 100वीं जयंती पर गूगल ने बनाया डूडल, पढ़िए उनकी खास कविताएं DA Image

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अमृता प्रीतम की 100वीं जयंती पर गूगल ने बनाया डूडल, पढ़िए उनकी खास कविताएं

amrita pritam

साहित्य की दुनिया में अमृता प्रीतम का नाम बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने हिन्दी और पंजाबी भाषा में कई कविताएं लिखीं। इसके साथ ही उनके उपन्यास और निबंध भी खूब पसंद किए गए। अमृता की निजी जिन्दगी से जुड़े कई किस्से चर्चा में रहे हैं। इस महान कवियत्री की आज जयंती है। 

अमृता का जन्म 31 अगस्त 1919 को पंजाब के गुजरांवाला में हुआ था। हालांकि अब यह जगह पाकिस्तान में है। अमृता को बचपन से लिखने और पढ़ने का शौक था। अमृता की 100वीं जयंती के मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें याद किया। गूगल ने एक बेहतरीन तस्वीर को डूडल में तब्दील किया है। अमृता की कविताएं काफी पसंद की जाती थीं और हैं। उनकी जयंती के मौके पर पढ़िए कुछ खास कविताएं...

चुप की साज़िश -

रात ऊँघ रही है...
किसी ने इन्सान की
छाती में सेंध लगाई है
हर चोरी से भयानक
यह सपनों की चोरी है।

मैं तुझे फिर मिलूँगी -

मैं तुझे फिर मिलूँगी
कहाँ कैसे पता नहीं
शायद तेरे कल्पनाओं
की प्रेरणा बन
तेरे केनवास पर उतरुँगी
या तेरे केनवास पर
एक रहस्यमयी लकीर बन
ख़ामोश तुझे देखती रहूँगी
मैं तुझे फिर मिलूँगी
कहाँ कैसे पता नहीं

या सूरज की लौ बन कर
तेरे रंगो में घुलती रहूँगी
या रंगो की बाँहों में बैठ कर
तेरे केनवास पर बिछ जाऊँगी
पता नहीं कहाँ किस तरह
पर तुझे ज़रुर मिलूँगी

या फिर एक चश्मा बनी
जैसे झरने से पानी उड़ता है
मैं पानी की बूंदें
तेरे बदन पर मलूँगी
और एक शीतल अहसास बन कर
तेरे सीने से लगूँगी

मैं और तो कुछ नहीं जानती
पर इतना जानती हूँ
कि वक्त जो भी करेगा
यह जनम मेरे साथ चलेगा
यह जिस्म ख़त्म होता है
तो सब कुछ ख़त्म हो जाता है

पर यादों के धागे
कायनात के लम्हें की तरह होते हैं
मैं उन लम्हों को चुनूँगी
उन धागों को समेट लूंगी
मैं तुझे फिर मिलूँगी
कहाँ कैसे पता नहीं

मैं तुझे फिर मिलूँगी!!

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