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केजरीवाल को देख लोगों को बड़ी बोतल नजर आएगी, शराब घोटाले पर अमित शाह का तंज

मित शाह ने कहा कि मैं एक वोटर के तौर पर कह सकता हूं कि केजरीवाल जहां-जहां जाएंगे, वहां लोगों को शराब घोटाला याद आएगा। कई लोगों को तो बड़ी बोतल दिखाई देगी। उन्होंने अंतरिम बेल मिलने पर भी बात की।

केजरीवाल को देख लोगों को बड़ी बोतल नजर आएगी, शराब घोटाले पर अमित शाह का तंज
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 17 May 2024 09:37 AM
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होम मिनिस्टर अमित शाह ने अरविंद केजरीवाल के अंतरिम बेल पर निकल चुनाव प्रचार करने पर तंज कसा है। केजरीवाल के बाहर आने से INDIA अलायंस को फायदा हुआ है? इस सवाल पर अमित शाह ने कहा कि मैं एक वोटर के तौर पर कह सकता हूं कि केजरीवाल जहां-जहां जाएंगे, वहां लोगों को शराब घोटाला याद आएगा। कई लोगों को तो बड़ी बोतल दिखाई देगी। उन्होंने ANI को दिए इंटरव्यू में एक बार फिर से केजरीवाल को मिली अंतरिम बेल पर बात की। अमित शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। 

उन्होंने कहा, 'लेकिन उस फैसले को जिस तरह से आम आदमी पार्टी, कुछ मीडिया समूह और ज्यादातर पत्रकार को केजरीवाल की विजय मान रहे हैं। मैं ऐसा नहीं मानता।' होम मिनिस्टर ने कहा कि इनकी अर्जी सुप्रीम कोर्ट में थी कि मेरी गिरफ्तारी है गैरकानूनी है, जिसे अदालत ने नहीं माना। इसके बाद इन्होंने फिर से बेल की अर्जी दाखिल की, उसे भी खारिज कर दिया गया। फिर इनकी ओर से अंतरिम बेल दायर की गई, जिसे अदालत ने शर्तों के साथ मान लिया। यदि इन्हें अपने ऊपर इतना ही विश्वास है तो फिर सेशन कोर्ट में अर्जी डालें और मांग करें कि मेरे ऊपर लगे आरोप ही गलत हैं।

अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि आप मुझे वोट दो, फिर मुझे कोई जेल नहीं भेजेगा। इस पर अमित शाह ने कहा कि इस पर उन जज साहब को सोचना है, जिन्होंने इनको बेल दिया। इससे बड़ी अवमानना अदालत की नहीं हो सकती। क्या कोर्ट किसी की जय या फिर पराजय के आधार पर निर्णय लेगा। केजरीवाल की यह बात देश के सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर भी बड़ी टिप्पणी है। होम मिनिस्टर ने इस दौरान कई और मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने आर्टिकल 370 पर सवाल उठानों को जवाब दिया कि ये लोग देखें कि आज श्रीनगर में पोलिंग ने रिकॉर्ड तोड़ा है। इससे समझा जा सकता है कि आर्टिकल 370 हटने का क्या असर हुआ है।

पहले चुनाव के बहिष्कार के नारे लगते थे। अब एक डंडा भी नहीं चला है और पूरे धैर्य के साथ वोटिंग हुई है। इससे पहले पता चलता है कि बदलाव हुआ है। पहली बार 40 फीसदी से ज्यादा विस्थापित कश्मीरी पंडितों ने मतदान किया। अब तक यह आंकड़ा 3 फीसदी से ज्यादा नहीं पहुंचा था। यह बताता है कि जनता में आत्मविश्वास आया है और उन्हें लगता है कि हम लोकतंत्र के साथ रह सकते हैं।